Wednesday , April 25 2018
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कठुआ सामूहिक बलात्कार मामले में आज से सुनवाई

कठुआ में 8 वर्ष की बच्ची से सामूहिक बलात्कार  मर्डर के मामले में आज से न्यायालय में सुनवाई प्रारम्भ होगी. यह सुनवाई आठआरोपियों के विरूद्ध की जाएगी, जिन पर बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद उसकी मर्डर करने का आरोप लगा है. आरोप है कि इन्होंने 8 वर्षकी बच्ची को जनवरी में अगवाह किया  एक हफ्ते तक मंदिर में बंधकर बनाकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया. आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है, जिसके विरूद्ध एक अलग चार्जशीट दाखिल की गई है. वहीं पीड़िता की एडवोकेट दीपिका सिंह राजावत ने अपने साथ बलात्कारया मर्डर कराए जाने की संभावना जताई है. उन्होंने जम्मू व कश्मीर से बाहर केस ट्रांसफर करने की मांग की है.

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नाबालिग के विरूद्ध अलग चार्जशीट

अधिकारियों ने बोला कि कठुआ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार एक चार्जशीट को सुनवाई के लिए सत्र न्यायालय के पास भेजेंगे जिसमें सात लोग नामजद हैं. हालांकि नाबालिग आरोपी के विरूद्ध मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनवाई करेंगे, क्योंकि किशोर कानून के तहत यह विशेष न्यायालय है. जम्मू व कश्मीर गवर्नमेंट ने इस संवेदनशील मामले में सुनवाई के लिए दो विशेष वकीलों की नियुक्ति की है  दोनों ही सिख हैं.

20 अप्रैल को जम्मू आएगी बार काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम

कठुआ (रसाना) हत्याकांड की जांच  पूरे प्रकरण में वकीलों की किरदार की समीक्षा करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआइ) की पांच सदस्यीय टीम 20 अप्रैल को जम्मू जाएंगी. यह टीम कठुआ के रसाना गांव जाकर जमीनी दशा की समीक्षा करेगी. टीम अपने दौरे के दौरान पीड़ित परिवार के सदस्यों से भी मिलेगी. उसके बाद जम्मू में जे एंड के हाई न्यायालय बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से मीटिंग कर पूरे प्रकरण में वकीलों की किरदार की पड़ताल करेगी. रसाना मामले में राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश गया है कि बार एसोसिएशन ने आरोपितों को बचाने का कोशिश किया इसके चलते जम्मू बंद रखा गया. ऐसे में बार काउंसिल की टीम का यह दौरा जरूरी माना जा रहा है.रविवार को दिल्ली में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की मीटिंग हुई जिसमें पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया. दिल्ली हाई न्यायालय के पूर्व चीफ जस्टिस तरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित कमेटी में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सह-चेयरमैन एस प्रभाकरण और रमेश चंद्रा, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की प्रमुख रजिया बेग तथा पटना हाई न्यायालय के एडवोकेट नरेश दीक्षित शामिल हैं. बीसीआइ ने निर्णय किया है कि उक्त कमेटी की रिपोर्ट सुप्रीम न्यायालय के सामने पेश की जाएगी.

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सुप्रीम न्यायालय में 19 अप्रैल को होगी सुनवाई

रसाना हत्याकांड की जांच  इस पूरे प्रकरण में वकीलों की किरदार का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम न्यायालय ने 13 अप्रैल को राज्य गवर्नमेंट और जेएंडके हाई न्यायालय बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया था. अब सुप्रीम न्यायालय को 19 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई करनी है. ऐसी उम्मीद है कि जेएंडके हाई न्यायालय बार एसोसिएशन की ओर से मुख्यसीनियर वकील बीएस सलाथिया और महासचिव प्रेम सदोत्रा के अतिरिक्त कुछ अन्य वरिष्ठ एडवोकेट बुधवार को दिल्ली के लिए रवाना होंगे. अगले दिन सुप्रीम न्यायालय के सामने अपना पक्ष रखेंगे. इस बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपनी मीटिंग में यह फैसला लिया कि काउंसिल की ओर से सुप्रीम न्यायालय में आवेदन दायर कर इस सुनवाई को कुछ दिनों के लिए स्थगित करने का आग्रह किया जाएगा ताकि तब तक काउंसिल की टीम कठुआ और जम्मू का दौरा कर अपनी रिपोर्ट सौंप दे.

गौरतलब है कि सुप्रीम न्यायालय द्वारा 13 अप्रैल को जम्मू बार एसोसिएशन तथा कठुआ बार एसोसिएशन को आड़े हाथ लिए जाने के बाद अब सुनवाई सुचारू ढंग से चलने की उम्मीद जताई जा रही है. सुप्रीम न्यायालय ने इस मामले में कुछ वकीलों द्वारा न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने पर कड़ी असहमति जताई थी.

मुझे धमकियां मिल रही हैं: पीड़िता की महिला वकील

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इस मामले में CM महबूबा मुफ्ती ने पीड़ित परिवार को 90 दिनों के अंदर न्याय दिलाने की हाई न्यायालय के मुख्य न्यायधीश से वकालत की है. ऊधर पीड़िता का केस लड़ रही महिला एडवोकेटदीपिका राजावत ने मामले की जांच राज्य से बाहर करवाने की मांग की है. उन्होंने सुप्रीम न्यायालयमें याचिका दायर करने की भी बात कही है. दीपिका ने संभावना जताई है कि राज्य में मामले की सुनवाई से पीड़िता को न्याय नहीं मिल सकता. इससे पहले भी दीपिका ने जम्मू बार एसोसिएशन के मुख्य बीएस सलाथिया पर यह आरोप लगाया था कि उन्हें इस मामले की पैरवी से पीछे हटने की धमकियां मिल रही हैं, लेकिन सलाथिया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था. दीपिका का कहना है कि उनकी जान को खतरा है, उन्हें लगता है कि उनका भी दुष्कर्म या मर्डर की जा सकती है.

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