Thursday , November 15 2018
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सरकारी कर्मचारियों को सुप्रीम न्यायालय ने दी राहत

सुप्रीम न्यायालय ने शुक्रवार को 44 लाख वर्तमान  रिटायर्ड केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए बोला कि सीजीएचएस देश के सभी व्यक्तिगत अस्पतालों में लागू होगा, चाहे वो पैनल में शामिल हो या नहीं हो. 

सरकारी कर्मचारियों का है अधिकार
कोर्ट ने बोला कि अच्छी मेडिकल सुविधाएं पाना प्रत्येक सरकारी कर्मचारी का अधिकार है. इसलिए केंद्र गवर्नमेंट ऐसे किसी भी बिल का भुगतान करने से मना नहीं कर सकती है, अगर कर्मचारी ने पैनल में नहीं शामिल किसी भी प्राइवेट अस्पताल में उपचार कराया हो.

इलाज लिया है या नहीं यह जानना जरूरी
सुप्रीम न्यायालय ने साफ किया कि गवर्नमेंट को यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या वाकई में संबंधित आदमी ने उपचार लिया है या नहीं. अगर उसने ऐसे किसी प्राइवेट अस्पताल में उपचार लिया है, जो पैनल में शामिल नहीं है तब भी उसे सभी बिलों का भुगतान होना चाहिए. केवल एक टेक्निकल आधार पर भुगतान किसी भी हालत में रुकना नहीं चाहिए.

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नंबर लेने के लिए होगी औनलाइन व्यवस्था
सीजीएचएस की राष्ट्र भर के ज्यादातर बड़े शहरों में डिस्पेंसरियां हैं, जहां केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनरों  उनके आश्रितों को मुफ्त उपचार की सुविधा है. इसके साथ ही दवाएं भी डिस्पेंसरियों में मुफ्त भी मिलती हैं. चिकित्सक को दिखाने  दवाएं लेने के लिए लाभार्थियों को वेलनेस सेंटर यानी डिस्पेंसरी के काउंटर से नंबर लेना पड़ता है.

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लाभार्थियों में ज्यादा संख्या पेंशनरों की है, सो नंबर लेने के लिए अक्सर उन्हें लंबी लाइन में खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है. इस समस्या को देखते हुए केंद्र गवर्नमेंट ने फैसला लिया है कि वेलनेस सेंटर के काउंटर के साथ नंबर लेने की व्यवस्था औनलाइन भी कर दी जाए ताकि लाभार्थियों को इसके लिए लंबी लाइन न लगानी पड़ी.

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