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सुप्रीम न्यायालय जमानत याचिकाएं सुनेगा

जस्टिस जे चेलमेश्वर ने सोमवार को बोला कि संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन सुप्रीम न्यायालय को जमानत याचिकाएं सुननी पड़ेंगी. उन्होंने बोलाकि न्यायालय के क्षेत्राधिकार को फिर से देखे जाने की आवश्यकता है. जिस तरह से इस न्यायालयके क्षेत्राधिकार में विस्तार हुआ है, उससे समस्याएं बढ़ी हैं. यह न्यायालय केवल संविधानिक मुद्दों पर निर्णय के लिए थी. स्थायी संविधानिक पीठ की आवश्यकता पर उन्होंने बोला कि इस मामले पर गौर किए जाने की जरूरत है.

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जस्टिस चेलमेश्वर सुप्रीम न्यायालय में वरिष्ठता में दूसरे नंबर के वरिष्ठ जज हैं. वह तीन अन्य जजों के साथ सुप्रीम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के विरूद्ध संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुर्खियों में आए थे. इंडियन उच्च न्यायपालिका : मुद्दे  संभावनाएं विषय पर आयोजित चर्चा में शामिल हुए जस्टिस चेलमेश्वर ने कोलेजियम बैठकों में  अधिक पारदर्शिता की वकालत की.

साथ ही बोला कि एक जज की पदोन्नति के समय शायद उसके कार्य से ज्यादा उसकी छवि अहमियत रखती है. चयन प्रक्रिया में शामिल लोगों को अन्य समस्याओं को दरकिनार कर उसके कार्य को प्रमुखता देनी चाहिए.

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