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बस हादसे में बुझ गए एक ही गांव के 10 चिराग

नूरपुर के चेली में पेश आए दिल विदारक हादसे में एक ही गांव के 10 चिराग बुझ गए. हादसे में छह छात्र, जबकि चार छात्राएं काल का ग्रास बनीं. इस हादसे में पुहाड़ा निवासी एक परिवार को ताउम्र न भूलने वाले जख्म भी मिले हैं.
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हादसे में उनके घर के दो चिराग एक साथ संसार से रुखसत हुए हैं. जानकारी के अनुसार हादसे में पुहाड़ा निवासी नरेश का पुत्र नैतिक  पुत्री श्रुतिका एक ही परिवार से बताए जा रहे हैं. वहीं पहाड़ा गांव से ही भविष्य जम्बाल सुपुत्र राधव जम्बाल, हर्ष पठानिया सुपुत्र राधव सिंह, परमीश ठाकुर पुत्र रघुनाथ निवासी, स्नेहा सुपुत्री अजय सिंह, पलक जम्बाल

सुपुत्री राजेश सिंह, प्रणव सुपुत्र कर्म सिंह निवासी पुहाड़ा, जानवी निवासी पुहाड़ा  कार्तिक कटोच सुपुत्र सुरजीत कटोच निवासी पुहाड़ा शामिल हैं. हादसे का खबर मिलने के बाद पूरा पुहाड़ा गांव चीखो-पुकार से गूंज उठा  पूरे गांव में मातम सा माहौल है.

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अस्पताल चीखों पुकार से गूूंज रहा था

नूरपुर के चेली गांव में हुए सड़क हादसे के शिकार बच्चों के मृत शरीर नुरपुर अस्पताल में शाम करीब 4 बजे पहुंचना प्रारम्भ हुए. मृत शरीर एंबुलेंस में नहीं, बल्कि लोकल लोगों की व्यक्तिगत गाड़ियों में पहुंचाए जा रहे थे.कई परिजन तो अपने जिगर के टुकड़ों को अपने हाथों में उठाकर अस्पताल पहुंच रहे थे.

परिजनों को यकीन नहीं हो रहा था कि उनके साथ इतना बड़ा एक्सीडेंट हो चुका है. पूरा अस्पताल चीखो पुकार से गूूंज रहा था.बच्चों की मौत पर परिजन अपने जिगर के टुकड़ों को गले लगाकर रो रहे थे. अस्पताल में माहौल बेहद मार्मिक था. हादसे में कई घरों के तो इकलौते चिराग ही बुझ गए.

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कुछ बच्चों को स्कूल में पहला तो कुछेक का दूसरा  तीसरा दिन ही था. अस्पताल में पूरा स्टाफ पहले से अलर्ट हो गया था. चिकित्सक  पूरा स्टाफ घायलों की जान बचाने में जुट गया. अस्पताल में शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी  खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर भी पहुंच गए थे. अस्पताल में शाम करीब 10 बजे पठानकोट स्थित अमनदीप अस्पताल से चार मृत शरीर आने का इंतजार किया जा रहा था.

दर्दनाक हादसे ने मारे गए बच्चों की पहचान ही बदल दी. आई कार्ड पहनकर कभी स्कूल में अपने नाम से पहचाने वाले बच्चों के शवों को अब टैग नंबर दे दिए गए हैं. हर मासूम के मृत शरीर पर एक धागे से बांधकर टैग लगाया गया है जिसमें उसकी मृत शरीर संख्या लिखी हुई है.

परिजनों को भी यही नंबर दिया जा रहा है ताकि वह मृत शरीर को नाम की बजाय इसी टैग नंबर से पहचान सके.जिंदगी  मौत के बीच का अंतर कितना बड़ा हो सकता है, यह इस हादसे ने दिखा दिया.हादसे में मारे गए हर बच्चे को जिंदा रहने तक हर्ष, सारिका स्नेहा  मनीष जैसे नाम से पुकारा जाता था.

बच्चे भी इसी नाम को सुनकर अपनी रिएक्शन देते थे. लेकिन उन्हीं बच्चों की मौत के बाद उनकी पहचान के नाम भी बदल गए.किसी को एक नंबर दिया गया तो किसी मृत शरीर पर 10, 23, 17 जैसे नंबर लिखकर टांग दिए गए. परिजन भी इन्हीं नंबरों से अपने बच्चों की लाशों को तलाशते दिखे.परिजनों को अपनों के मृत शरीर की इसी तरह तलाश करता देख हर किसी की आंख भर आई.

नूरपुर व्यक्तिगत बस हादसे में मृतक बच्चों का मंगलवार को पोस्ट मार्टम होगा. मंगलवार को प्रातः काल नौ से 11 बजे तक अस्पताल में मृतक बच्चों का पोस्ट मार्टम होगा. इसके बाद बच्चों के मृत शरीर परिजनों को सौंपे जाएंगे.

इसके बाद मृतक बच्चों का अंतिम संस्कार होगा. उपायुक्त कांगड़ा संदीप कुमार ने सेहत विभाग को मंगलवार को प्रातः काल ही मृतक बच्चों का पोस्टमार्टम करने के आदेश जारी कर दिए हैं.

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