Tuesday , November 20 2018
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चौथी सालगिरह पर मोदी गवर्नमेंट छेड़ेगी बड़ा प्रचार अभियान

केंद्र गवर्नमेंट अपनी चौथी वर्षगांठ पर अगले महीने बड़ा प्रचार अभियान छेड़ने जा रही है. इस अभियान की थीम होगी – पांच वर्ष का कार्य चार वर्ष में ही कर दिखाया. इसके लिए गवर्नमेंट ने सभी मंत्रालयों से उनके प्रदर्शन  उपलब्धियों के आंकडे़ जुटाकर पीएम ऑफिस भेजने के आदेश दिए हैं.
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गवर्नमेंट के प्रचार अभियान के केंद्र में गरीब  दलितों के लिए बनाई योजनाओं की उपलब्धियां होंगी ताकि विपक्ष के इस प्रोपेगंडा की काट की जा सके कि यह गवर्नमेंट गरीब  दलित विरोधी है.

गवर्नमेंट ने असंगठित एरिया के मजदूरों का प्रॉविडेंट फंड काटने का प्रावधान किया है जिसके ब्याज की रकम गवर्नमेंट चुकाएगी. इससे उनके नियोक्ताओं पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा. साथ ही गवर्नमेंटके प्रचार अभियान में 12 रुपये प्रतिवर्ष की दर पर एक्सीडेंट बीमा  एक रुपये रोजाना की दर पर पंद्रह वर्ष तक देने से साठ वर्ष की आयु के बाद 5000 रुपये प्रतिमाह की पेंशन का प्रावधान है.  यह रकम लेने के लिए उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे बल्कि यह पैसा डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से हर महीने उनके जनधन बैंक खाते में आ जाएंगे.

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आधार से बचाए 50000 करोड़
गवर्नमेंट ने पिछले चार वर्षों में डीबीटी के जरिए बचाए हैं. यह सब आधार की वजह से फर्जी लाभार्थियों की पहचान करने से संभव हुआ है. गवर्नमेंट का मानना है कि वे लोग ही निजता के नाम पर आधार का विरोध कर रहे हैं जिनके आर्थिक हितों पर अंधकार की वजह से कुठाराघात हुआ है.

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इनसे हुआ गरीबों को लाभ
गवर्नमेंट के प्रचार अभियान में उज्ज्वला योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन  पहला सिलेंडर देना, उजाला योजना के तहत मुफ्त एलईडी बल्ब बांटना, सौभाग्य योजना के तहत हर घर तक बिजली पहुंचाना, इंद्रधनुष योजना के तहत दो वर्ष तक की आयु के बच्चों को सात बीमारियों से बचने की मुफ्त टीकाकरण  जन धन योजना के तहत सभी के जीरो बैलेंस के बैंक खाते खुलवाना शामिल हैं.

एक वर्ष में दिए साढ़े पांच करोड़ रोजगार!
भाजपा ने हर वर्ष दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था. इसमें असफल रहने का आरोप विपक्ष लगातार मोदी गवर्नमेंट पर लगा रहा है. इसकी काट करने के लिए केंद्र गवर्नमेंट ने नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) के मापदंड बदल रही है. अब जिन लोगों को गवर्नमेंट ने अपना रोजगार प्रारम्भ करने के लिए तीन वर्ष पहले प्रारम्भ हुई मुद्रा योजना के तहत कर्ज उपलब्ध कराया है, उनकी गिनती भी नौकरियों (जॉब्स) में की जाएगी. केवल एक वर्ष (2015-16) के दौरान ही केंद्र गवर्नमेंट ने 4.53 करोड़ लोगों को 50,000 रुपये का कर्ज उपलब्ध कराया है. इस वर्ष 2.28 करोड़ रुपये का कर्ज स्वीकृत हुआ.

जितना कहा, उतना किया

सरकार का मानना है कि उसने पिछले चार वर्षों में गरीबों के लिए कार्य तो बहुत से किए हैं लेकिन फिर भी विपक्ष उसकी छवि गरीब विरोधी बनाने में जुटा है. इसकी मुख्य वजह है गवर्नमेंट अपनी उपलब्धियों को जनता तक नहीं पहुंचा पाई है. गवर्नमेंट के साथ ही इन योजनाओं का प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी बीजेपी के संगठन की भी होगी. इसके लिए कार्यकर्ताओं को पार्टी का 2014 का घोषणापत्र के साथ उपलब्धियों की सूची दी जाएगी. वे गांव-गांव जाकर लोगों को बताएंगे कि पार्टी ने जितने वादे किए थे, उनमें से अधिकांश पूरे कर दिए हैं.

मोदीकेयर होगी गेमचेंजर
भाजपा नेताओं का मानना है कि हाल ही में पचास करोड़ लोगों के लिए पीएम द्वारा घोषित सेहतयोजना (मोदीकेयर) का पार्टी को वैसा ही लाभ होगी जैसा 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टीको रोजगार गारंटी स्कीम (मनरेगा) से हुआ था.

गत हफ्ते लिखे इस लेटर में प्रसाद ने बोला है, रिकॉर्डों से यह पता नहीं चलता है कि आरोप लगाने वाली महिला को अपना मामला रखने का मौका दिया गया. कर्नाटक न्यायालय की महिला जज अथवा वरिष्ठ महिला न्यायिक ऑफिसर ने इसकी जांच की. जैसा कि विशाखा मामले में सुप्रीम न्यायालय ने निर्णय दिया है. उन्होंने कहा, कनिष्ठ न्याय ऑफिसर की ओर से अपने वरिष्ठ ऑफिसर पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की इतनी संक्षिप्त पड़ताल, कई गंभीर सवाल खड़े करती है. इस बीच, सूत्रों के अनुसार, गवर्नमेंट ने जस्टिस चेलमेश्वर के उन आरोपों को भी खारिज कर दिया है, जिनमें बोला गया है कि कार्यपालिका नियुक्तियों को लेकर की गई न्यायिक सिफारिशों को रोक रही है. गवर्नमेंट भट्ट की पदोन्नति की कॉलेजियम की सिफारिश पर जल्दबाजी में नहीं है.

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