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FB पर चुनावी एडवरटाईजमेंट देने से पहले कराना होगा वेरिफिकेशन

कैंब्रिज एनालिटिका (सीए) द्वारामें दुनियाभर की आलोचना झेल रहे फेसबुक ने अपनी साख को फिर से मजबूत करने के लिए अपनी नीतियों में परिवर्तन का निर्णय लिया है। फेसबुक के संस्थापक व सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बोला है कि अब राजनीतिक एडवरटाईजमेंट बिना जांच-पड़ताल के नहीं मिलेंगे, साथ ही राजनीतिक पार्टियों के पेज का भी वेरिफिकेशन कराना होगा। जुकरबर्ग ने बोला कि संसार में चुनावों को विश्वसनीय बनाने के लिए वे अब किसी भी राष्ट्र के चुनावों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। उन्होंने बोला कि अमेरिका, मैक्सिको, ब्राजील, हिंदुस्तान व पाक में होने वाले चुनावों में एडवरटाईजमेंट देने वालों को सत्यापन कराना होगा, तभी उनके एडवरटाईजमेंट लिए जाएंगे।

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एआई टूल से रुकेगा फर्जीवाड़ा
अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में जुकरबर्ग ने लिखा है कि 2016 के अमेरिकी चुनावों में रूस की दखलंदाजी का पता चलने के बाद उन्हों ने एआई टूल (AI tool) का प्रयोग किया व इस टूल से 2017 में जर्मन, फ्रेंच व अलबामा चुनावों के दौरान हजारों फर्जी अकाउंट हटाए गए। उन्होंने बताया कि अभी हाल ही में एक रूसी न्यूज संगठन समेत बड़े पैमाने पर फर्जी खातों को बंद किया था।

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कराना होगा वेरिफिकेशन
जुकरबर्ग ने अपने पेज पर लिखा है कि कोई भी विज्ञापनदाता जो कोई राजनीतिक विचार या एडवरटाईजमेंट देना चाहते हैं उन्हें खुद को पहले सत्यापन कराना होगा। विज्ञापनदाता को अपनी पहचान व लोकेशन का भी वेरिफिकेशन कराना होगा। उन्होंने लिखा है कि जो भी कंपनी इन नियमों पर खरी नहीं उतरेगी, उनका एडवरटाईजमेंट फेसबुक पर नहीं दिखाया जाएगा।

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जुकरबर्ग ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि राजनीतिक विज्ञापनों में ज्यादा से ज्यादा पारदर्शिता लाने के लिए बनाए गए टूल का कनाडा में ट्रायल चल रहा है व यहां के बाद इसे बड़े पैमाने पर लॉन्च किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उन लोगों का भी वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिनके बहुत सारे फॉलोअर्स हैं व जो कई पेज एकसाथ चलाते हैं। इस तरह से झूठ सूचनाएं फैलाने पर रोक लगेगी।

डेटा लीक का मामला
बता दें कि फेसबुक इन दिनों डेटा लीक का मामला झेल रहा है। ब्रिटेन की कैंब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक से करीब 5 करोड़ लोगों के डेटा चुराकर उनका चुनावों में प्रयोग किया था। आरोप है कि अमेरिकी चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जीतवाने के लिए इन डेटाओं का प्रयोग किया गया था। हिंदुस्तान में भी कुछ चुनावों में इस तरह के डेटा का प्रयोग होने के आरोप लगे हैं। इस मामले में मार्क जुकरबर्ग ने सरेआम माफी भी मांगी थी।

भारत से भी जुड़े थे तार
कैंब्रिज एनालिटिका (सीए) के एक पूर्व कर्मचारी व व्हिसल ब्लोअर क्रिस्टोफर वाइली ने ब्रिटेन की संसद की डिजिटल, संस्कृति, मीडिया एवं खेल (डीसीएमएस) कमेटी के समक्ष 27 मार्च को बोला था कि कैंब्रिज एनालिटिका ने हिंदुस्तान में बड़े पैमाने पर कार्य किया व कांग्रेस पार्टी उसके ग्राहकों में से एक थी। उन्होंने बोला कि कैंब्रिज एनालिटिका की मूल कंपनी एससीएल इंडिया ने यूपी में कुछ जातिगत सर्वेक्षण किए थे।

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