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ऑनलाइन मीडिया पर लगाम की वकायद से मोदी सरकार अब पतन की ओर…देखें पूरा सच

नई दिल्ली: अभी हाल फ़िलहाल फर्जी न्यूज़ के नाम पर पत्रकारों की मान्यता रद्द करने को आमादा मोदी सरकार की इसके लिए जब सत्ता से लेकर सड़क तक हर गलियारे में किरकिरी हुयी थी तो मजबूरन स्थिति को भाँपते हुये सरकार ने अपने नोटिफिकेशन को जारी करने के बाद अपनी सफाई पेश करते हुये इसको तुरन्त वापस ले लिया था।

गौरतलब है कि बैकफूट पर आई मोदी सरकार की जब प्रिंट व इलेक्ट्रोनिक मीडिया के पत्रकारों के सामने अपनी काली दाल नहीं गलती नज़र आई तो अब सरकार ने न्यूज़ पोर्टल के पत्रकारों का उत्पीड़न करने का अच्छा रास्ता खोज लिया है। मीडिया में यह खबर लगातार आ रही है की अब सरकार इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन खबर देने वाले न्यूज़ पोर्टलों पर लगाम कसने की तैयारी 2019 के लोक सभा चुनाव के पहले पहले ही कर चुकी है ताकि इस सरकार की विफलताओं को इंटरनेट के माध्यम से ये ऑनलाइन पोर्टल जनता तक पहुंचाने में सफल ना हो सके और जनता के बीच में सरकार की छवी धूमिल होने से बचाया जा सके।

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बता दें की मोदी सरकार अब न्यूज़ पोर्टलों पर अपना नियंत्रण करने के लिए नए नियम बनाने की घोषणा कर चुकी है और आने वाले 2019 के लोक सभा चुनाव के पहले इसको संभवतः लागू करने में सफल भी हो जाए। और यह भी हो सकता है की इस नियम के लागू होने से बहुत सारे ऑन लाइन न्यूज़ पोर्टल के लिए काम करने वाले कर्मी बेरोजगार भी हो जाए मगर इससे सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि यह सरकार रोजगार तो देने में सफल रही नहीं, लेकिन अपने अभी तक के कार्यकाल में इस सरकार ने बहुत सारे लोगों को बेरोजगार जरूर बना दिया है।

ऑनलाइन मीडिया पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने जो कमेटी गठित की है उसमें कोई भी सदस्य ऑनलाइन मीडिया से नहीं लिया गया है या बड़े ही आश्चर्य कि बात है। इस कमेटी में इलेक्ट्रोनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, प्रेस काउंसिल के प्रतिनिधियों के अलावा बाकी सभी केंद्र सरकार के मंत्रालयों के सचिव शामिल किए गए हैं। इसी बात से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं की ऐसे में कितना सही तरीके से पोर्टल मीडिया के साथ न्याय हो पाएगा।

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आनलाइन मीडिया से जुड़े व्यक्तियों का साफ तौर पर यही कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए अब नए नए बहाने ढूंढकर मीडिया पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है ताकि आने वाले 2019 लोक सभा चुनाव को धन-बल-छल से जीता जा सके और शायद पत्रकारों के उत्पीड़न का यह प्रयास मोदी सरकार के ताबूत की आखिरी किल ना साबित हो।

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मोदी जी और उनके टीम के लोग यह बखूबी जानते हैं की आनलाइन मीडिया इस दौर का सबसे प्रमुख मीडिया माध्यम बनकर उभर रहा है, शायद मोदी जी वो दिन नहीं भूलना चाहेंगे कि मोदी जी और उनके टीम के लोग सत्ता हासिल करने के लिए इसी ऑनलाइन मीडिया नाम के ब्रह्मास्त्र का सहारा लिए थे अतः इसके प्रभाव के डर को देखते हुये अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए ऑनलाइन मीडिया के पंख कुतरने को यह सरकारी पूरी तरह से कमर कस चुकी है।

अब शायद मोदी सरकार को खुद को जनता की नजरों में खलनायक बनने से रोकने के लिए आनलाइन मीडिया पर अंकुश लगाना ही आखिरी ब्रह्मास्त्र नज़र आ रहा है जिसको यह सरकार हर कीमत पर चलाना चाहती है मगर वहीं दूसरी तरह ऑनलाइन मीडिया से जुड़े लोग सरकार कि इस नीति के खिलाफ एक जुट होकर कमर कसने को तैयार दिख रहे हैं और अब ऐसे में युवा पत्रकार सरकार से आर-पार कि लड़ाई के मूड में नज़र आ रहा है।

आनलाइन मीडिया से जुड़े युवा वर्ग में इसका रोष इतना तेजी से बढ़ रहा है कि अब तो लोगों ने इसके लिए विशेष ग्रुप बनाकर सरकार के इस कदम पर बहस भी तेज कर दिया है।

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