Wednesday , November 21 2018
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मकान का किराया न चुकाने की वजह, 40 हजार किताबों को मकान में ही छोड़ना पड़ा

मकान का किराया न चुकाने की वजह से बिहार मैथिली अकादमी की चालीस हजार पुस्तकें किराए के एक मकान में आठ वर्षों से बंद है अकादमी 2010 से पहले एक किराए के मकान में चल रही थी जब ये सरकारी भवन में आई तो किराया बकाया होने के कारण 40 हजार किताबों को मकान में ही छोड़ना पड़ा जिन्हें अबतक नहीं छुड़ाया गया है किताबें सड़ रही हैं वहीं दूसरी तरफ मकान का किराया भी बढ़ता जा रहा है
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बिहार मैथिली अकादमी की दर्जनों पुस्तकें यूपीएससी से लेकर बीपीएससी तक के सिलेबस में चलती हैं सिलेबस की किताबों के लिए विद्यार्थी भटक रहे हैं  इधर चालीस हजार पुस्तकें किराये के मकान में पिछले आठ वर्षों से बंधक बनी हुई हैं अकादमी पिछले आठ वर्ष से उन किताबों को नहीं छाप रही है जो उसके स्टॉक में पहले से मौजूद हैं जो नयी पुस्तकें छपती हैं उनसे अकादमी को लगभग 6 लाख रुपये सालाना कमाई होती है जबकि इससे कम राशि के लिए पुस्तकें आठ वर्ष से बंधक हैं मैथिली अकादमी को अपना मकान किराए पर देने वाली राजकुमारी सिंह भी कम परेशान नहीं हैं इनका दर्द ये है कि न तो इन्हें किराया मिला  अब सड़ चुकी किताबें मकान को भी सड़ा रहीं हैं

राजकुमारी सिंह ने किराए के लिए न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है लेकिन वहां से न्याय कब मिलेगा इसका भी कोई पता नहीं बिहार मैथिली अकादमी आज अपना अस्तित्व खो चुकी है मगर 1989 के पहले इसके पास 213 पब्लिकेशन थे इसके दर्जनों पुस्तकों को सहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा जा चुका है

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