Tuesday , September 25 2018
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 भागवत ने बोला कि न्यायालय की सुनवाईयां व निर्णय स्‍थानीय भाषाओं में होने चाहिए

 बेशक हमारे राष्ट्र को आज़ाद हुए 70 बरस हो गए, लेकिन अंग्रेजों के जाने के बाद भी अंग्रेजी हमारे सरकारी दफ्तरों  न्यायालयों में व्यवहार की भाषा बनी हुई है जिसका दर्द हर इंडियन को होता है, जिसे इंडियन भाषा अभियान के एक आयोजन में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जुबां दे दी भागवत ने बोला कि न्यायालय की सुनवाईयां  निर्णय स्‍थानीय भाषाओं में होने चाहिए 
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उल्लेखनीय है कि बीजेपी की ओर से आयोजित प्रोग्राम में इंडियन भाषा अभियान का विषय ‘मां मातृभूमि  मातृभाषा का कोई विकल्‍प नहीं जनता को जनता की भाषा में न्‍याय’ थाविभिन्‍न उदाहरणों का हवाला दिया  बोला कि विदेशी भाषाओं के जरिए भावनाओं  अहसासों को सही तरीके से प्रकट नहीं किया जा सकता इसलिए अदालतों की सुनवाईयां निर्णय स्‍थानीय भाषाओं में होने चाहिए

आपको बता दें कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदुस्तान के न्यायालयों में इंडियन भाषाओं का उपयोग किया जाना चाहिए  यदि इसके लिए सॉफ्टवेयर विकसित करने की आवश्यकता पड़े तो वह भी बनाए जाने चाहिए इसके लिए उन्होंने तर्क दिया कि स्‍थानीय भाषाओं के उपयोग में अतिरिक्‍त खर्च आ सकता है तो अंग्रेजी के उपयोग में भी तो खर्च होता है भागवत ने सबको अपना कार्य इंडियन भाषाओं में करने  सर्वसम्‍मति से चुने गए एक इंडियन भाषा का उपयोग सभी कार्यों में करने की भी अपील की

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