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RBI ने कंपनियों को दिया निर्देश, भुगतान से जुड़ा डाटा राष्ट्र में ही रखें

ऐसे समय जब संसार में वित्तीय संस्थानों के पास ग्राहकों के डाटा की सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं तब इंडियन रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने इस बारे में एक अहम निर्णय किया है. मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआइ ने राष्ट्र में पेमेंट से जुड़े सभी वित्तीय संस्थानों को बोला है कि उन्हें छह महीने के भीतर अपना डाटा हिंदुस्तान में ही स्टोर करने की व्यवस्था करनी होगी. इसका प्रभाव यह होगा कि क्रेडिट और डेबिट कार्ड भुगतान की गारंटी देने वाली कंपनियां मास्टर कार्ड, वीजा को भी अपना डाटा हिंदुस्तान में स्टोर करना होगा.Image result for RBI ने कंपनियों को दिया निर्देश, भुगतान से जुड़ा डाटा राष्ट्र में ही रखें

 

इसके अतिरिक्त विदेशी बैंकों को ऐसी व्यवस्था करनी होगी. ग्राहकों का डाटा सुरक्षित रखने के साथ ही इसका एक दूसरा लाभ यह होगा कि हिंदुस्तान की अपनी भुगतान व्यवस्था (रूपे) की लोकप्रियता भी बढ़ेगी. आरबीआइ ने बोला है कि हाल के दिनों में हिंदुस्तान में पेमेंट से जुड़ी व्यवस्था का नेटवर्क बहुत ज्यादा विस्तार हुआ है. कई तरह के प्लेटफार्म सामने आये हैं तो कई नयी कंपनियां आई हैं नए-नए भुगतान के तरीके भी सामने आ रहे हैं. यह महत्वपूर्ण है कि इनमें जो डाटा जा रहा है, उसे सुरक्षित रखा जाए. इसके लिए इनकी गहन निगरानी भी महत्वपूर्ण है. अभी यह देखने में आया है कि बहुत कम पेमेंट कंपनियां ही अपना डाटा हिंदुस्तान में रखती हैं.

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डिजिटल करेंसी पर विचार:

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इसके साथ ही आरबीआइ ने यह भी बोला है कि वह केंद्रीय बैंक की तरफ से डिजिटल करेंसी जारी करने की भी तैयारी कर रहा है. इस पर सुझाव देने के लिए एक समूह गठित की गई है. खबर एजेंसी के अनुसार रिजर्व बैंक ने बिटकॉइन जैसी क्रिप्टो करेंसी को हतोत्साहित करने के लिए सख्ती कर दी है.सेंट्रल बैंक के नए निर्णय के तहत अब बैंक या ई-वॉलेट के जरिये बिटकॉइन की खरीद नहीं की जा सकेगी. यह कदम क्रिप्टो करेंसी के बढ़ते धोखाधड़ी के मामलों के बाद उठाया गया है.

भारतीय एकाउंटिंग प्रणाली के लिए एक साल

मौद्रिक नीति पेश करते हुए आरबीआइ ने घरेलू बैंकों में लागू की जाने वाली इंडियनएकाउंटिंगप्रणाली का भी जिक्र किया है. आरबीआइ ने माना है कि अधिकतर बैंकों की तैयारी बहुत ज्यादा अधूरी है. ऐसे में उन्हें एक साल का समय  दिया गया है. पिछले साल इंडियन बैंकों को अप्रैल, 2018 से इसे लागू करने को बोला गया था. अब यह अप्रैल, 2019 से लागू होगा.

हाल के समय में बैंकों में कई लोन घोटाले सामने आने पर रिजर्व बैंक ने बोला है कि बैंकों की निगरानी के लिए उसकी सीमित क्षमता है. उसने कानूनी विसंगतियां दूर करने के लिए बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में संशोधन करने का सुझाव दिया है.

बैंकों की निगरानी को रेगुलेशन एक्ट में संशोधन का सुझाव

रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने प्रेस कांफ्रेंस में बोला कि सरकारी  प्राइवेट बैंकों के लिए उसके अधिकारों में विसंगतियां हैं. पंजाब नेशनल बैंक में 13,000 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आने के बाद पटेल ने सार्वजनिक तौर पर बोला था कि सरकारी बैंकों की निगरानी के लिए रिजर्व बैंक के पास कानूनी अधिकार सीमित हैं. रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एन एस विश्वनाथन ने बोला कि बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में संशोधन करने की आवश्यकता है. बैंकिंग घोटाले सामने आने के बाद रिजर्व बैंक की पहली मौद्रिक नीति आई है. इसमें बैंक ने पूरे मामले पर अपनी स्थिति साफ करने का कोशिशकिया.

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