Wednesday , September 26 2018
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फेक न्यूज़: पीएम के निर्णय के बाद भी चिंताएं बरक़रार

 लोकतांत्रिक राष्ट्र में कोई सरकारी विभाग या मंत्रालय को समाचारों का सच-झूठ तय करने की फिक्र सताए  इस फिक्र में वह सजा तक मुकर्रर करने लगे, तो सतर्क हो जाना चाहिए कि कहीं कोई बुनियादी गड़बड़ी है बुनियादी गड़बड़ी इसलिए क्योंकि सत्ता  ताकत के बंटवारे के सिद्धांत पर चलने वाले लोकतांत्रिक राष्ट्र में खबर  गवर्नमेंट के बीच छत्तीस का आंकड़ा होता है होना भी चाहिए इसिलए तो सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने फेक समाचार पर गाइडलाइन जारी करते हुए मीडिया जगत में तहलका मचा दिया था

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जिस पर पत्रकारों ने अधिकारों के हनन होने का आरोप लगाया, पत्रकारों के भीषण विरोध के बाद पीएम मोदी ने गाइडलाइन के आदेश को तो यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि इस मामले का सम्बन्ध प्रेस कॉउन्सिल ऑफ़ इंडिया  समाचार ब्राडकास्टिंग एसोसिएशन से है  ये दोनों संस्थाएं ही इस बारे में निर्णय लेने का अधिकार रखती हैं लेकिन इसके बाद भी इस मामले में अब भी चिंताएं बरक़रार हैं बताया जा रहा है कि मंत्रालय, डिजिटलऔरऑनलाइन न्यूज़ कंटेंट पर फैल रही फेक न्यूज़ पर रोक लगाने की तैयारी कर रहा है इसके लिए एक महीने से कार्य चल रहा है इसको लेकर मंत्रालय ने एक कमेटी भी बनाई थी, जो कि डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग  न्यूज़ पोर्टल्स के लिए पॉलिसी पर कार्य कर रही थी अभी इस कमेटी की कुछ बैठकें हो चुकी हैं  जल्द ही इस बारे में ड्राफ्ट भी जारी किया जा सकता है

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इस कमेटी में I&B, कानून, टेलिकॉम, इंडस्ट्री मंत्रालय के अधिकारियों के साथ प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, NBA, IBF के मेंबर्स भी शामिल हैं फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, ट्विटर भी इसके भीतर ही आते हैं सबसे पहले इनसे जुड़े कुछ रेगुलेशन आएंगे, जिसके बाद औनलाइन न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा कोड ऑफ कंडेक्ट लाया जा सकता है साफ है कि जिस तरह से औनलाइन मीडिया पर लोगों की निर्भरता बड़ी है, उसको देखते हुए मंत्रालय की प्रयास है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गलत जानकारी ना फैले

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