X
    Categories: उत्तराखण्ड

यहां छठीं क्लास के बच्चे पढ़ रहे ABCD

कक्षा छह के जिन छात्र-छात्राओं को फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और गणित इंग्लिश मीडिएम में पढ़ना है, वे नए शिक्षा सत्र में अंग्रेजी वर्णमाला एबीसीडी के स्मॉल और कैपिटल लेटर लिखना सीख रहे हैं। हिंदी वर्णमाला का इन्हें क,ख,ग,घ भी सिखाया जा रहा है।

स्कूलों में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के पाठ्यक्रम की पुस्तकें लागू किए जाने संबंधी राज्य सरकार के निर्णय से भले ही अभिभावक इस वक्त खुश हैं, लेकिन बाजार में एनसीईआरटी की पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध न हो पाने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। कहा तो यह गया था कि नए शिक्षा सत्र से दो हफ्ते पहले पुस्तकें  बुक स्टालों पर उपलब्ध होंगी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

विद्यालयों में छात्र-छात्राएं दाखिला ले रहे हैं, लेकिन पुस्तकें न मिलने से पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई। यही स्थिति रही तो छात्रों के सामने कोर्स पूरा करने में मुश्किलें खड़ी होंगी। बुधवार को एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू होने का तीसरा दिन रहा है।

Loading...

बच्चों की पढ़ाई का हालचाल लेने अमर उजाला टीम विद्यालयों में पहुंची। लाइव रिपोर्ट:-

सुबह के 11.30 बजे हैं। हम पथरीबाग स्थित श्रीलक्ष्मण विद्यालय इंटर मीडिएट कालेज पहुंचे। यहां कक्षाएं चल रही हैं। एक छात्र टाई लगाए तेजी से सामने से निकला। ‘किस कक्षा में हो?’ ‘छह में।’ ‘बुक्स मिल गईं?’, ‘अभी नहीं।’ ‘क्या पढ़ रहे हो?’ ‘अब पढ़ेंगे’, कहकर छात्र चला गया। सामने प्रधानाचार्य राम लखन गैरोला का चेंबर है। ‘कितने बच्चों ने प्रवेश लिया?’ ‘अभी तक सौ डेढ़ सौ बच्चों ने प्रवेश लिया है।’ ‘पुस्तकें मिलीं?’ ‘पुस्तकें न मिलने से बहुत दिक्कत आ रही है। पुस्तकों के लिए छात्र परेशान हैं। किसी भी कक्षा के एक भी विषय की पूरी पुस्तकें नहीं मिलीं। कक्षा छह के जो नए बच्चे आए हैं उन्हें हिंदी और अंग्रेजी की वर्णमाला सिखा रहे हैं। अंग्रेजी के स्मॉल और कैपिटल लेटर सिखा रहे हैं। कुछ बच्चे तो बहुत कमजोर हैं। पुस्तकें मिल जाएं तो पढ़ाएं। वैसे एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय बहुत अच्छा है। इससे समानता रहेगी।’

दोपहर के 12.30 बजे हैं। अमर उजाला टीम लक्खीबाग स्थित राजकीय बालिका इंटर कालेज पहुंची। यहां राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के भवन में कुछ छात्राएं बैठी बाते कर रही हैं। ‘एनसीईआरटी की पुस्तकें मिल गईं?’ ‘अभी बुक स्टाल पर नहीं आईं’, संक्षिप्त उत्तर देकर वे अपने में व्यस्त हो गईं। प्रधानाचार्य नीलम जोशी अपने कक्ष में सीमैट से आए दिशा-निर्देश पढ़ने में व्यस्त थीं। ‘मेम, एनसीईआरटी की पुस्तकें आ गईं?’ ‘अभी नहीं आईं, फोर्थ क्लास कर्मचारी को बुक स्टाल वाले के पास भेजा है। उसने बोला है कि कुछ दिनों में आ जाएंगी।’ ‘कितने बच्चों ने एडमिशन लिया है?’ ‘कक्षा छह में 14 और कक्षा 9 में 20 बच्चे आए हैं।’ फिर बोलीं, कि जब तक एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की पुस्तकें नहीं आतीं, पिछली कक्षा के कोर्स का रिवीजन कराया जा रहा है। इसके अलावा विज्ञान आदि के विशेषज्ञों को बाहर से बुलाकर छात्रों को जानकारी दिला रहे हैं।

loading...

दोपहर के एक बजकर 8 मिनट हुए हैं। राजकीय इंटर कालेज, पटेलनगर में अभी-अभी छुट्टी हुई है। बाईं तरफ की दालान से छात्राओं का एक समूह सामने आ गया। ‘आज कक्षाएं चलीं?’ ‘जी।’ ‘नए पाठ्यक्रम की पुस्तकें मिल गईं?’ ‘अभी नहीं मिलीं। पुराने कोर्स का रिवीजन कर ले रहे हैं’, इतना कहकर छात्राओं का ग्रुप आगे बढ़ गया। आगे बढ़ने पर एक शिक्षक मिल गए। पूछने पर कि ‘नया पाठ्यक्रम लागू है, कितने छात्रों को पुस्तकें नहीं मिल पाईं?’ अचकचा से गए, फिर सामने खड़ीं चार शिक्षिकाओं की तरफ इशारा किया, ‘वे बताएंगी।’ शिक्षिकाओं ने बात टालनी चाही। बोलीं कि अभी तो नए शिक्षा सत्र को दो-तीन दिन ही हुए हैं। पहले बच्चों को नए पाठ्यक्रम के लिए तैयार तो कर लें। सामने से कक्षा आठ के छात्र आ रहे हैं। ‘पुस्तकें मिलीं?’ ‘अभी नहीं।’ ‘बुक स्टाल वाले ने कहा है कि कुछ दिनों में आ जाएंगीं।’ ‘नए पाठ्यक्रम से घबराहट?’ ‘नहीं सर, यह तो अच्छा हुआ है।

Loading...
News Room :