Wednesday , September 26 2018
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सरकार ने बनाया IT शिकायत समाधान तंत्र

जीएसटीएन पोर्टल की खामियों के चलते कठिनाई का सामना कर रहे कारोबारियों को गवर्नमेंट ने बड़ी राहत दी है. केंद्र ने ऐसे करदाताओं की दिक्कत दूर करने के लिए आइटी शिकायत समाधान तंत्र बनाया है. गवर्नमेंट के इस कदम के बाद अब ऐसे करदाता भी अपना ट्रान-1 फॉर्म (ट्रांजीशनल क्रेडिट के लिए) जमा कर सकेंगे, जो GST पोर्टल में गड़बड़ी की वजह से ऐसा नहीं कर पाए हैं. ऐसे करदाताओं के लिए ट्रान-1 फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि भी बढ़ाकर 30 अप्रैल 2018 कर दी गई है.

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ट्रान-1 फॉर्म उन व्यापारियों को भरना था जिन्हें एक जुलाई 2017 से पूर्व की अवधि के लिए इनपुट कर क्रेडिट लेना चाहते थे. हालांकि GST पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ी के चलते ये कारोबारी ऐसा नहीं कर सके. इसीलिए अब इन्हें यह राहत दी गयी है. वित्त मंत्रालय का मानना है कि गवर्नमेंट के इस फैसला से 17,573 करदाताओं को लाभ होगा  वे 2,583 करोड़ रुपये सीजीएसटी क्रेडिट  1,112 करोड़ रुपये एसजीएसटी क्रेडिट ले सकेंगे.

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वेबटेल इलेक्ट्रोसॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर राजेन्द्र कपूर ने बोला कि देर से उठाया लेकिन सही दिशा में कदम है. अब शिकायत सही स्थान पहुंचेगी  सही स्थान पर उसका निवारण मिल जाएगा. फॉर्म ट्रान-1 अपलोड करने में बहुत से लोगों को दिक्कत आई थी. आइटी हेल्प डेस्क इसका निवारण नहीं कर पा रहा था, इसलिए गवर्नमेंट को आइटी शिकायत समाधान तंत्र बनाना पड़ा.

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वित्त मंत्रालय के अनुसार GST पोर्टल की तकनीकी खामियों के चलते कारोबारियों को हो रही कठिनाई को दूर करने के लिए गवर्नमेंट ने आइटी से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए एक तंत्र स्थापित किया है. GST काउंसिल ने आइटी शिकायत समाधान समिति को करदाताओं की शिकायत पर विचार करने  महत्वपूर्ण कदम उठाने की सिफारिश GST नेटवर्क से करने की शक्तियां दी हैं.

यह राहत मिलने के बाद करदाताओं को पूर्व में दाखिल किए गए रिटर्न में संशोधन करने  विशेष परिस्थितियों में अंतिम तिथि के बाद में भी रिटर्न दाखिल करने की अनुमति होगी. हालांकि बिजली आपूर्ति बाधित होने या इंटरनेट की उपलब्धता न होने जैसे लोकल मुद्दों की वजह से अगर किसी करदाता से संबंधित पर्सनल समस्या का इस तंत्र के तहत निवारण नहीं होगा. मंत्रालय के मुताबिक इस तंत्र में यह प्रावधान भी किया गया है कि करदाताओं को फील्ड अधिकारियों या नोडल अधिकारियों को कॉमन पोर्टल की गड़बड़ी के बारे में बताते हुए एक आवेदन देना होगा ताकि यह साबित किया जा सके कि गड़बड़ी के चलते करदाता रिटर्न दाखिल नहीं कर सका. इसके बाद शिकायत समाधान समिति महत्वपूर्ण हल सुझाएगी.

इन्हें भी दी गई राहत

जीएसटी काउंसिल ने उन करदाताओं को भी राहत दी है, जो आइटी तंत्र में तकनीकी गड़बड़ी जैसे डिजिटल सिग्नेचर के अच्छा से कार्य न करने से निर्धारित तारीख तक ट्रान-1 फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके. जो करदाता आइटी गड़बड़ी के चलते ट्रान-1 दाखिल नहीं कर पाए हैं, उन्हें अब 30 अप्रैल 2018 तक का समय दिया जाएगा. जीएसटीआर-3बी 31 मई 2018 तक दाखिल किया जा सकेगा.

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