Thursday , September 20 2018
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रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों का करेंगे दौरा

ढाका: म्यांमार गवर्नमेंट के एक मंत्री बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के शिविरों का दौरा करेंगेएक ऑफिसर ने यह जानकारी दी म्यांमार की सेना की ओर से करीब सात लाख रोहिंग्या मुस्लिमों को अपने राष्ट्र की सीमा से बाहर करने के बाद यह पहला ऐसा दौरा है बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की कि म्यांमार के समाज कल्याण, राहत एवं पुनर्वास मंत्री विन म्यात आय शिविरों का दौरा करेंगे जहां कुल 10 लाख रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं विदेश मंत्रालय में महानिदेशक तारिक मुहम्मद ने से कहा, ‘‘ उनका प्रोग्राम अभी तय नहीं है ’’ म्यांमार के मंत्री का दौरा 11 या 12 अप्रैल को होने वाला है

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म्यांमार में हुई हत्याएं नरसंहार की बानगी : संयुक्त देश अधिकारी
म्यांमार मुद्दे पर संयुक्त देश की विशेष प्रतिवेदक ने बीते 1 फरवरी को इन आरोपों को फिर दोहराया था कि ‘म्यांमार की सेना द्वारा रोहिंग्या मुसलमानों की मर्डर नरसंहार की बानगी है ‘ खबर एंजेसी एफे के मुताबिक, सियोल में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यांगी ली ने इस संकट पर चर्चा करने के लिए बांग्लादेश  एरिया के अन्य हिस्सों में शरणार्थी शिविरों का दौरा करने के अनुभव को बताया पिछले वर्ष 25 अगस्त को विद्रोहियों द्वारा सरकारी चौकियों पर हमला किए जाने के जवाब में म्यांमार की सेना द्वारा प्रारम्भ किए गए आक्रामक अभियान के चलते रखाइन प्रांत से कम से कम 688,000 रोहिंग्या मुसलमान पड़ोसी राष्ट्र बांग्लादेश पलायन कर चुके हैं ली ने कहा, “म्यांमार की कार्रवाई इन्सानियत के विरूद्ध क्राइम जैसी थी ” उन्होंने कहा, “ये नरसंहार की बानगी का भाग हैं ”

 

दो साल के अन्दर सभी रोहिंग्याओं की वतन वापसी पर समझौता
संयुक्त देश के अनुसार, 25 अगस्त के बाद से लगभग 6,55,500 रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश में प्रवेश कर चुके हैं, जबकि 5,00,000 रोहिंग्या वहां पहले से ही रह रहे हैं बांग्लादेश में हाल में हुई हिंसा से पहले प्रवासी विभाग ने 30,000 रोहिंग्याओं को शरणार्थी के तौर पर मान्यता दी थी म्यांमार  बांग्लादेश गवर्नमेंट में रोहिंग्याओं के राष्ट्र प्रत्यावर्तन पर एक समझौता हुआ है इसके तहत म्यांमार इस समझौते की आरंभ के दिन से दो साल के अन्दर सभी रोहिंग्याओं का बांग्लादेश से प्रत्यावर्तन हो जाएगा

पिछले वर्ष अगस्त में हिंसा
म्यांमार में रोहिंग्या मुससमानों के गढ़ रखाइन प्रांत में रोहिंग्या विद्रोहियों द्वारा सैन्य चौकियों पर हमला करने के बाद सुरक्षा बलों ने अगस्त 2017 के अन्तिम हफ्ते में जबाबी कार्रवाई के तहत रोहिंग्या मुसलमानों के विरूद्ध अभियान छेड़ दिया था इसके बाद रोहिंग्या मुसलमानों ने म्यांमार से पलायन प्रारम्भ कर दियारखाइन प्रांत में लगभग 10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान रह रहे थे, जिन्हें म्यांमार गवर्नमेंट ने मान्यता नहीं दी थी संयुक्त देश  अन्य मानवाधिकार संगठन बोल चुके हैं कि म्यांमार में मानवाधिकारों के हनन के स्पष्ट सबूत मिले हैं संयुक्त देश में मानवाधिकार उच्चायुक्त ने इस सैन्य अभियान को जातीय संहार करार देते हुए इसे नरसंहार का इशारा बताया था

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