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नोएडा अथारिटी के दो दर्जन कर्मचारियों की जॉब गई

एससीएसटी कोटे में जॉब पाने वाले नोएडा अथारिटी के करीब दो दर्जन कर्मचारियों की जॉब चली गई है. सुप्रीम न्यायालय ने इन कर्मचारियों को जॉब से बर्खास्त करने के नोएडा अथारिटी  इलाहाबाद न्यायालय के आदेश पर अपनी मुहर लगा दी है.

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तृतीय  चतुर्थ श्रेणी के इन कर्मचारियों की आरक्षित एससीएसटी कोटे में साल 2002 से 2003 के बीच नियुक्तियां हुईं थी. आरोप के मुताबिक इन कर्मचारियों के जाति प्रमाणपत्र यूपी के नहीं थे इस कारण वें यूपी में एससीएसटी वर्ग के आरक्षण का फायदा पाने के योग्य नहीं थे.

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न्यायमूर्ति मूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कर्मचारियों की विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज करते हुए बोला कि उन्हें न्यायालय के आदेश में दखल देने का कोई उचित आधार नजर नहीं आता. सुप्रीम न्यायालय का ये निर्णय जनवरी माह का है. बताया जाता है कि न्यायालय के आदेशों के सहारे बर्खास्तगी के बावजूद लंबे समय से जॉब करते चले आ रहे इन लोगों को अब नोएडा अथारिटी ने तत्काल असर से बर्खास्त करना प्रारम्भ कर दिया है.

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मामले के अनुसारं नोएडा अथारिटी ने साल 2002 से 2003 के बीच पांच चरणों में एससीएसटी आरक्षित कोटे में तृतीय  चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की भर्ती की. बाद में भर्ती कर्मचारियों में से करीब दो दर्जन कर्मचारियों के जाति प्रमाण लेटर नियम के मुताबिक यूपी के नहीं होने की शिकायतें आयीं. राज्य गवर्नमेंट ने इसकी जांच माथुर आयोग को सौंपी. आयोग ने जांच में पाया कि उत्तर प्रदेश रिजर्वेशन (एससीएसटी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग) कानून 1994  राज्य गवर्नमेंट के 1964 और2007 के आदेश के मुताबिक आरक्षित वर्ग में उन्हीं को जॉब दी जा सकती है जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के हों एवं यूपी के स्थाई निवासी हों. इसके अतिरिक्त उन्हें यूपी की सक्षम अथारिटी ने जाति प्रमाणपत्र जारी किया हो.

इन कर्मचारियों पर आरोप था कि ये यूपी के स्थाई निवासी नहीं हैं  इन्हें जाति प्रमाणपत्र भी यूपी के बाहर राज्यों से जारी हुआ था. आयोग ने बोला कि इनकी नियुक्ति नियमों का उल्लंघन करके हुई है.नोएडा अथारिटी के तत्कालीन सीईओ ने 2010 में इन कर्मचारियों की जॉब से बर्खास्तगी का आदेश दिया. कर्मचारियों ने बर्खास्तगी को इलाहाबाद न्यायालय में चुनौती दी. न्यायालय की एकलपीठ ने उनकी याचिकाएं स्वीकार करते हुए जॉब से बर्खास्तगी का आदेश रद कर दिया. जिसके विरूद्धनोएडा अथारिटी ने न्यायालय की खंडपीठ में विशेष अपील दाखिल की.

खंडपीठ ने 28 मई 2014 को नोएडा अथारिटी की अपील स्वीकार करते हुए एकलपीठ का आदेश रद कर दिया. खंडपीठ ने निर्णय में बोला कि भले ही ये कर्मचारी दोनों राज्यों जहां के वे जॉब ज्वाइन करने से पहले स्थाई निवासी थे  उत्तर प्रदेश, में अनुसूचित जाति वर्ग में आते हों, लेकिन उनका जाति प्रमाणपत्र दूसरे राज्य का है. उनका जाति प्रमाणपत्र यूपी की सक्षम अथारिटी का जारी नहीं है इसलिए वे नोएडा अथारिटी में आरक्षण का फायदा लेने के ऑफिसर नहीं हैं. हालांकि न्यायालय ने बोला था कि कर्मचारियों से जॉब के लाभों की वसूली नहीं की जाएगी.

हाईकोर्ट के इस आदेश को कर्मचारियों ने सुप्रीम न्यायालय मे चुनौती दी थी. नोएडा के एडवोकेटरविन्द्र कुमार ने कानूनी स्थिति बताते हुए न्यायालय मे याचिकाओं का विरोध किया जबकि याचिकाकर्ताओं की ओर से अनुसूचित जाति वर्ग के होने की दलीलें दी गईं लेकिन न्यायालय ने दलीलें खारिज करते हुए न्यायालय के आदेश में दखल देने से इन्कार कर दिया.

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