Tuesday , November 13 2018
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कैग की रिपोर्ट में खुलासा – दिल्ली में राशन को लेकर बड़ी गड़बड़ी !

अब हम CAG की उस रिपोर्ट का विश्लेषण करेंगे, जिसने दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल को बहुत बेचैन कर दिया है CAG की इस रिपोर्ट ने दिल्ली में एक बड़े राशन घोटाले के इशारा दिए हैं ये घोटाला बिल्कुल वैसा ही है, जिस तरह 90 के दशक में लालू यादव ने बिहार में चारा घोटाला किया था इसलिए आज हम आपको संक्षेप में इस घोटाले के बारे में बताएंगे

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CAG रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 1 हज़ार 589 क्विंटल अन्न की ढुलाई के लिए 8 ऐसी गाड़ियों का प्रयोग किया गया, जिनका रजिस्ट्रेशन नंबर बस, Tempo, स्कूटर या बाइक का था इन वाहनों पर इतनी बड़ी मात्रा में अन्न की ढुलाई नहीं हो सकती लेकिन इसके बावजूद कागज़ों पर ऐसा दिखाया गया

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दिल्ली में राशन केन्द्र गवर्नमेंट देती है  उसकी डिलीवरी की ज़िम्मेदारी दिल्ली गवर्नमेंट की हैइसीलिए Food Corporation of India के गोदामों से दिल्ली गवर्नमेंट राशन की ढुलाई करवाती हैबिहार में हुए चारा घोटाले में भी ऐसा ही किया गया था, वहां जानवरों का हज़ारों टन चारा  स्कूटरों के ज़रिए उठाया गया था  जो अपने आप में असंभव सी बात लगती है

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2016-17 की इस CAG रिपोर्ट में दिल्ली गवर्नमेंट पर बहुत से सवाल उठाए गए हैं इस दौरान दिल्ली सरकार, अपने बजट के 47 हज़ार 429 करोड़ रुपये में से सिर्फ 37 हज़ार 620 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाई आवंटित पैसों का करीब 21% पैसा गवर्नमेंट खर्च ही नहीं कर पाई 359 करोड़ रुपये की 12 योजनाएं तो ऐसी थीं, जिनमें एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ

CAG के मुताबिक 2 अक्टूबर 2014 से स्वच्छ हिंदुस्तान मिशन की आरंभ हुई थी  इसके ढाई वर्षबाद तक, दिल्ली में इस योजना के तहत एक भी शौचालय नहीं बना  इसके लिए आवंटित 40 करोड़ 31 लाख रुपये की रकम का प्रयोग नहीं हुआ लेकिन इसके बाद भी केजरीवाल गवर्नमेंट सार्वजनिक तौर पर यही कहती रही कि हम कार्य करते रहे  वो परेशान करते रहे जबकि असलियत ये है कि कार्य हुआ ही नहीं

दिल्ली गवर्नमेंट का कहना है कि जो कमियां CAG रिपोर्ट में बतायी गयी हैं उनके लिये ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी अरविंद केजरीवाल करप्शन समाप्त करने के वादे के साथ दिल्ली के CM बने थे लेकिन CAG की ये रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में करप्शन समाप्त नहीं हुआ है

कुल मिलाकर केजरीवाल का वक़्त बेकार चल रहा है आजकल वो अपनी पुरानी गलतियों के लिए नेताओं से माफ़ी मांग रहे हैं  लेकिन उनकी गलतियों की लिस्ट इतनी लंबी है  कि लगता है उनका माफ़ी वाला सीज़न लंबे समय तक चलेगा फिल्हाल वो चाहें तो दिल्ली की जनता से माफ़ी मांग सकते हैं अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की Unauthorized Colonies में रहने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएं देने का पक्का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ है कुछ इलाकों की हालत तो इतनी ख़राब है कि फोटोज़ देखकर आपको ये भरोसा नहीं होगा कि ये दिल्ली का ही कोई भाग है

आज हम अरविंद केजरीवाल को दिल्ली की जनता की परेशानियों से जुड़ी एक स्पेशल रिपोर्ट दिखाना चाहते हैं अगर वो चाहें तो इसे एक Case Study की तरह ले सकते हैं  इन लोगों की समस्याएं दूर करने के लिए थोड़ी मेहनत कर सकते हैं

ये दिल्ली का आयानगर एरिया है, जो संसद से सिर्फ 21 किलोमीटर दूर है हज़ारों लोगों की आबादी वाला ये एरिया पिछले कई महीनों से पानी में डूबा हुआ है यहां कई घरों के अंदर पानी भरा हुआ है, कुछ घरों की दीवारें गिर चुकी हैं  कई घर ऐसे भी हैं जिनमें दरारें आ गयी है ये कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है बल्कि ये नतीजा है आम लोगों  प्रशासन की लापरवाही का दिल्ली के CM अक्सर ये कहते रहते हैं कि केन्द्र गवर्नमेंट उन्हें कार्य करने का मौका नहीं दे रही है, लेकिन हमारी इस रिपोर्ट को देखने के बाद अगर वो चाहें तो दिल्ली के आया नगर इलाके में जाकर अपने हिस्से का कार्य कर सकते हैं

दिल्ली में इस समय 1640 Unauthorized Colonies हैं जिनमें करीब 50 लाख लोग रहते हैं यानी एक वोटबैंक के रूप में इनकी स्थिति बहुत मज़बूत हैं  राजनीतिक पार्टियां अपने इस वोट बैंक को बेकार नहीं करना चाहती इसीलिए Unauthorized Colonies आराम से बस जाती हैं  इसके लिए दोषी लोगों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाता

वर्ष 2015 में New Delhi Municipal Corporation यानी NDMC ये बात कह चुकी हैं कि दिल्ली की 90 फीसदी इमारतें असुरक्षित हैं क्योंकि इनका निर्माण National Building Code के तहत नहीं किया गया है  इस हिसाब से भूकंप जैसी किसी गंभीर आपदा की स्थिति में, सिर्फ़ 10 फीसदीइमारतें ही सुरक्षित रह पाएंगी

सिस्टम की कमज़ोर इच्छाशक्ति की वजह से पूरे राष्ट्र में गैरकानूनी निर्माण  गैरकानूनी कब्ज़ा एक बड़ी समस्या बन चुका हैं आप राष्ट्र के किसी भी हिस्से में चले जाइये वहां आपको Unauthorized Colonies मिल जाएंगी

इस समस्या का दूसरा पहलू ये भी है कि ऐसी जगहों में रहने वाले लोग अक्सर मूलभूत ज़रूरतों से वंचित रह जाते हैं  उनकी बात कोई नहीं सुनता हमारे सिस्टम की आंखें तभी खुलती हैं जब वहां कोई बड़ा एक्सीडेंट हो जाता है  कुछ लोगों की मौत हो जाती है

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