Monday , November 19 2018
Loading...
Breaking News

गैरकानूनी निर्माण और अनधिकृत कॉलोनियों पर सुप्रीम न्यायालय की टिप्पणी

सुप्रीम न्यायालय ने बुधवार को साफ किया कि वह गरीब, छोटे व्यापारियों  झुग्गी झोपड़ियों के विरूद्ध नहीं है. न ही वह उनके विरूद्ध कार्रवाई करने जा रहा है. शीर्ष न्यायालय ने बोला कि हमें असहमति उन रिहायशी इलाकों में स्थित कार शोरूम, रेस्तरां, साड़ियों के बड़े-बड़े शोरूम को लेकर है.रिहायशी इलाकों में बड़े-बड़े शोरूम को क्यों संरक्षण मिलना चाहिए. यह पिछले 33 साल से चला आ रहा है लेकिन सरकारी एजेंसियां चुपचाप बैठी हुई हैं.
Image result for गैरकानूनी निर्माण और अनधिकृत कॉलोनियों पर सुप्रीम न्यायालय की टिप्पणी

दिल्ली में गैरकानूनी निर्माण  अनधिकृत कॉलोनियों पर बरसते हुए सुप्रीम न्यायालय ने बोलादिल्ली के आम लोग मवेशी नहीं है. तमाम सरकारी एजेंसियों को यह समझना चाहिए कि दिल्ली की जनता जरूरी है. कुछ लोगों को संरक्षण देने के लिए दिल्ली के आम निवासियों के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. शीर्ष न्यायालय ने बोला कि गवर्नमेंट अपनी आंखें मूंद सकती है लेकिन हम नहीं.

न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर  न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, नगर निगम, डीडीए आदि को मीटिंग कर इस स्थिति से निपटने के लिए अच्छा सुझाव पेश करने के लिए बोला है. वहीं दिल्ली गवर्नमेंट ने बोला कि एक तिहाई जनता अनधिकृत कॉलोनियों में रहती है. एक झटके में उन्हें राजधानी से बाहर नहीं ‘फेंका’ जा सकता.

Loading...

सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी अनधिकृत कॉलोनियों  गैरकानूनी निर्माण के कारण कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो रही है. भूजल का स्तर बहुत ज्यादा नीचे चल गया है अगर एक साल दिल्ली में बारिश नहीं हुई तो पता नहीं दिल्ली का क्या होगा? अगली सुनवाई सोमवार को होगी.

loading...

रिहायशी इलाकों में कैसे चल रही हैं व्यावसायिक गतिविधियां?

पीठ ने केंद्र गवर्नमेंट की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एएनएस नादकर्णी से सवाल किया आखिर रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां कैसे चल रही है? आखिर आप इन लोगों को साल-दर-साल संरक्षण क्यों दे रहे हैं. जवाब में नादकर्णी ने बोला कि लोग रहते हैं तो उन्हें रोजमर्रा की चीजों की जरूरत है. चरणबद्ध तरीके से इसका निवारण निकालने की आवश्यकताहै. कानून को समाप्त कर देना निवारण नहीं है.

इस पर पीठ ने बोला कि हम ब्रेड, बटर, दूध आदि बेचने वालों के विरूद्ध नहीं है. बल्कि हमें असहमतिबड़े-बड़े कार, साड़ी के शोरूम  रेस्तरां से है. इन्हें हटाया जाना चाहिए. लेकिन आपने अब तक कुछ नहीं किया. जवाब में एएसजी ने बोला कि यह लोकल निकाय का कार्य है. जिस पर पीठ ने नाराजगी जताते हुए बोला कि केंद्र गवर्नमेंट यह नहीं कह सकती कि उसके पास क्षमता नहीं है. आपके पास क्षमता है लेकिन आप प्रयोग नहीं करना चाहते.

एएसजी ने बोला कि सुप्रीम न्यायालय को इस मामले की निगरानी करनी चाहिए  तमाम एजेंसी को आदेश देना चाहिए. लेकिन पीठ ने इस मामले की निगरानी करने से मना कर दिया. पीठ ने बोलाकि हम ‘पुलिस’ नहीं है. आखिर आप यह कैसे कह सकते हैं कि न्यायालय को यह करना चाहिए.

पीठ ने बोला कि दिल्ली के लोगों को कठिनाई होती रहे, हमें क्या फर्क पड़ता है’ वाला रवैया नहीं चलेगा. शीर्ष न्यायालय ने बोला कि गवर्नमेंट अपनी आंखें मूंद सकती है लेकिन हम नहीं मूंद सकते.पीठ ने शहरी विकास और आवास मंत्रालय, डीडीए, दिल्ली गवर्नमेंट  निगम को मीटिंग कर सोमवार तक सुझाव देने के लिए बोला है. पीठ ने बोला है कि सुझाव ऐसे होने चाहिए जो अच्छा हैं.

Loading...
loading...