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जब इस कलाकार ने लेखन के लिए सीएम का पद ठुकराया

4 अप्रैल को वरिष्ठ हिंदी कवि, लेखक  पत्रकार माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती है माखनलाल चतुर्वेदी ने शिक्षण  लेखन जारी रखने के लिए CM के पद को ठुकरा दिया था उन्होंने बोला था कि एक साहित्यकार का CM बनना उसकी पदावनति होगी उनका जन्म 4 अप्रैल, 1889 को मध्य प्रदेश के बावई में हुआ था राधावल्लभ संप्रदाय से आने के कारण इन्हें वैष्णव पद कंठस्थ थेप्राथमिक एजुकेशन के बाद ये घर पर ही संस्कृत का अध्ययन करने लगे 15 साल की अवस्था में इनका शादी हो गया

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1. माखनलाल जी के व्यक्तित्व के कई पहलू देखने को मिलते हैं एक ज्वलंत पत्रकार, जिन्होंने प्रभा, कर्मवीर  प्रताप का संपादन किया, उनकी कविताएं, नाटक, निबंध, कहानी, उनके सम्मोहित करने वाले  प्रभावशाली भाषण, वे आत्मा से एक शिक्षक थे 20वीं सदी की आरंभ में इन्होंने काव्य लेखन प्रारम्भ किया था स्वतंत्रता आंदोलन में वे गरम दल के नेता बाल गंगाधर तिलक के साथ-साथ आजादी के लिए अहिंसा का मार्ग अपनाने वाले महात्मा गांधी से भी बहुत प्रभावित हुएस्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण वे कई बार कारागार भी गए

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2. 1913 में ‘प्रभा पत्रिका’ का संपादन किया इसी समय ये स्वतंत्रता संग्राम सेनानी  पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी के संपर्क में आए, जिनसे बेहद प्रभावित हुए इन्होंने वर्ष 1918 में प्रसिद्ध ‘कृष्णार्जुन युद्ध’ नाटक की रचना की  1919 में जबलपुर में ‘कर्मयुद्ध’ का प्रकाशन किया स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण 1921 में इन्हें अरैस्ट कर लिया गया, इसके बाद 1922 में रिहा हुएवर्ष 1924 में गणेश शंकर विद्यार्थी की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने ‘प्रताप’ का संपादन किया

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3. कवयित्री महादेवी वर्मा अपने साथियों को माखनलाल चतुर्वेदी का एक किस्सा बताती थीं कि जब हिंदुस्तान स्वतंत्र हुआ तो मध्य प्रदेश के CM पद के लिए उन्हें चुना गया जब उन्हें इसकी सूचना दी गई तो इन्होंने कहा, “शिक्षक  साहित्यकार बनने के बाद CM बना तो मेरी पदावनति होगी ” उन्होंने CM के पद को ठुकरा दिया इसके बाद रविशंकर शुक्ल को CM बनाया गया

4. ‘हिमतरंगिनी’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया हिंदुस्तानगवर्नमेंट ने वर्ष 1963 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया 10 सितंबर, 1967 को ‘राजभाषा संविधान संशोधन विधेयक’ के विरोध में उन्होंने पद्म भूषण लौटा दिया यह विधेयक राष्ट्रीय भाषा हिंदी का विरोधी था ‘एक इंडियन आत्मा’ के नाम से कविताएं लिखने के कारण उन्हें ‘एक इंडियनआत्मा’ की उपाधि दी गई थी

5. उन्होंने ‘हिमकिरीटिनी’, ‘हिम तरंगिनी’, ‘युग चरण’, ‘समर्पण’, ‘मरण ज्वार’, ‘माता’, ‘वेणु लो गूंजे धरा’, ‘बीजुरी काजल आंज रही’ जैसी प्रमुख कृतियों सहित कई अन्य रचनाएं कीं महान साहित्यकार माखनलाल चतुर्वेदी ने 30 जनवरी, 1968 को इस संसार को अलविदा कह दिया

 

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