Saturday , October 20 2018
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आदेश पलटने के लिए सुप्रीम न्यायालय जाएगी सरकार

विश्वविद्यालयों के लिए नयी फैकल्टी आरक्षण व्यवस्था की घोषणा करने के कुछ हफ्तों बाद ही गवर्नमेंट इस निर्णय को पलटने के लिए सुप्रीम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रही है. घोषणा के बाद यह व्यवस्था विवादों में घिर गई थी.

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एक प्रोग्राम में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ‘आरक्षण के लिए विश्वविद्यालय को या विभाग को इकाई माना जाए, इस पर भ्रम है. इस मामले पर विचार-विमर्श के लिए एक अंतर मंत्रालयी समिति गठित की गई है. हमने कानूनी सलाह भी ली है  सुप्रीम न्यायालयमें विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने का निर्णय लिया है.

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बता दें कि इलाहाबाद हाई न्यायालय के आदेश के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पांच मार्च को फैकल्टी आरक्षण की नयी व्यवस्था लागू करने की घोषणा की थी. इसके तहत कुल पदों की गणना संस्थान के आधार पर करने की बजाय विभाग के आधार पर करने की व्यवस्था की गई थी. सुप्रीम न्यायालय ने भी हाई न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा था. लेकिन इस निर्णय के गंभीर परिणाम होने की संभावना है क्योंकि इससे एससी-एसटी फैकल्टी सदस्यों के लिए उपलब्ध पदों की संख्या में कमी आ सकती है.

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यूजीसी ने बोला है कि नया आरक्षण फॉर्मूला पिछले वर्ष अप्रैल में इलाहाबाद हाई न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के मुताबिक है. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में अध्यापकों की नियुक्ति मामले की सुनवाई करते हुए हाई न्यायालय ने बोला था कि आरक्षण के लिए पूरे विश्वविद्यालय की बजाय हर विभाग को इकाई माना जाना चाहिए. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आदेश पर यूजीसी द्वारा नियुक्त समिति ने इस विषय पर 10 अदालती आदेशों का अध्ययन किया  सभी विश्वविद्यालयों में इलाहाबाद हाई न्यायालय का आदेश लागू करने की सिफारिश की थी.

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