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‘मन एवं आत्मा का परिष्कार करता है शिक्षण मानव’

मेरा जन्म नुओरो के एक छोटे शहर सार्दिनिया में हुआ था. मेरे पिता बहुत ही संपन्न जमींदार थे, जो अपने खेतों पर खेती करते थे. वह मेहमाननवाज आदमी थे  आसपास के शहरों में उनके कई मित्र थे. जब मेरे पिता के मित्र  उनके परिजन किसी छुट्टी पर या व्यावसायिक कार्य से हमारे शहर आते थे, तो वे हमारे ही घर पर ठहरते थे. इस तरह मुझे अपने उपन्यासों के विभिन्न पात्रों को जानने का मौका मिला.

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मैंने नुओरो में ही प्रारंभिक एजुकेशन प्राप्त की. उसके बाद मैं एक शिक्षक से घर पर ही इतालवी सीखने लगी. वह मुझे लिखने के लिए विषय सुझाते थे. उन विषयों पर लिखी मेरी कुछ कहानियां इतनी अच्छी थीं कि उन्होंने उन रचनाओं को अखबारों में छपाने की सलाह दी. रचनात्मक अभिव्यक्ति  ज्ञान में खुशी जगाना शिक्षक की सर्वोच्च कला है  उन्होंने यही किया. मेरा मानना है कि एक महान शिक्षक एक महान कलाकार होता है  ऐसे शिक्षक महान कलाकारों की तरह ही बहुत कम मिलते हैं.

शिक्षण कलाओं से भी महान काम है, क्योंकि यह मानव मन एवं आत्मा का परिष्कार करता है. खैर, उस समय मेरी आयु मात्र तेरह वर्ष ही थी  मुझे मालूम नहीं था कि अपनी कहानियों के प्रकाशन के लिए किसके पास जाना चाहिए. तभी मैं एक फैशन मैगजीन के संपर्क में आई, उसे मैंने अपनी एक कहानी छपने के लिए भेज दी. वह तुरंत छप गई. फिर मैंने एक उपन्यास लिखा  एक संपादक को भेज दिया. छपने के बाद वह बहुत ज्यादा पास हुआ. फिर तो सिलसिला चल निकला. मैंने कुछ कविताएं भी लिखीं, जो किसी संकलन में नहीं हैं.

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