Tuesday , November 20 2018
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सुप्रीम न्यायालय : अस्थायी प्रावधान नहीं है अनुच्छेद 370

सुप्रीम न्यायालय ने मंगलवार को एक बार फिर बोला कि जम्मू व कश्मीर को विशेष दर्जा दिलाने वाली संविधान की अनुच्छेद 370 कोई अस्थायी प्रावधान नहीं है. न्यायालय ने इस सिलसिले में पिछले वर्ष सारफेसी एक्ट केस में दिए फैसला का भी हवाला दिया.
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जस्टिस एके गोयल  आरएफ नरीमन की पीठ कुमारी विजयालक्ष्मी झा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली न्यायालय द्वारा 11 अप्रैल, 2017 को अनुच्छेद 370 को अस्थायी प्रकृति की घोषित करने की उनकी अपील ठुकराए जाने के फैसला के विरूद्ध सुप्रीम न्यायालय से आग्रह किया गया था. पीठ ने कहा, ये मुद्दा इसी न्यायालय के 2017 सारफेसी मामले में दिए फैसलासे जुड़ा है, जहां हम अनुच्छेद 370 की संक्षिप्त किरदार के बावजूद उसके अस्थायी प्रावधान नहीं होने की बात मान चुके हैं.

सुनवाई के दौरान केंद्र गवर्नमेंट की तरफ से पेश अलावा सॉलिस्टिर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता ने इस मुद्दे को न्यायालय के सामने लंबित ऐसे ही कुछ अन्य मुद्दों के साथ सुने जाने की अपील की, जो जल्दी ही पेश होने वाले हैं. जम्मू व कश्मीर गवर्नमेंट की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन  शोएब आलम ने इसका यह कहते हुए विरोध किया कि न्यायालय के सामने लंबित मामले अनुच्छेद 35ए से जुड़े हैं, ना की एएसजी की तरफ से बताए गए अनुच्छेद 370 से. इसके बाद न्यायालय ने एएसजी की मांग पर सुनवाई 3 हफ्ते के लिए स्थगित कर दी.

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बता दें कि अपनी याचिका में विजयाकुमारी झा ने दावा किया था कि अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था, जो साल 1957 में संवैधानिक विधानसभा के खत्म होने के साथ ही समाप्त हो गया था.उन्होंने यह भी दावा किया कि जम्मू व कश्मीर की संवैधानिक विधानसभा के खत्म होने के बाद भी अस्थायी प्रावधान वाली अनुच्छेद 370  जम्मू व कश्मीर के संविधान को हिंदुस्तान के राष्ट्रपति या हिंदुस्तान की संसद से स्वीकृति नहीं मिलने के बावजूद जारी रखना हमारे संविधान से धोखे के बराबर है.

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