Tuesday , September 25 2018
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SC/ST एक्ट के नाम पर हिंसा

नई दिल्ली . दो अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा हिंदुस्तान बंद के दौरान हुई हिंसक घटनाओं में 11 लोगों की मौत हो गई है, जबकि आगजनी  तोड़फोड़ में सरकारी और व्यक्तिगत संपत्तियों को भारी नुकसान भी पहुंचाया गया. ऐसे में सवाल भी खड़े होते हैंकि आखिरकार लोगों की मौत  सरकारी और व्यक्तिगत संपत्ति के नुकसान का जिम्मेदार कौन है? कौन इस नुकसान की भरपाई करेगा? क्या कहता है कानून?, अाइए जानते हैं.

भारत बंद का राज्यों पर असर

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सोमवार को हिंदुस्तान बंद का प्रभाव सबसे ज्यादा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड  झारखंड में देखने को मिला. जहां दलित संगठनों द्वारा जबरन दुकानों को बंद कराया गया. दशा ऐसे थे कि विद्यार्थियों के कोचिंग सेंटर में तोड़फोड़ की गई , व्यक्तिगत वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया  रेल सेवाओं को भी बाधित किया गया. यहां तक की कई वाहनों को आग के हवाले तक कर दिया गया. पुलिस पर पथराव का भी मामला सामने आया.

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भारत बंद का हरियाणा पर असर

दलित प्रदर्शनकारियों ने जहां हरियाणा में दर्जनभर से अधिक रोडवेज बसें को क्षतिग्रस्त कर दिया.बाजारों में तोड़फोड़ की  ट्रेनों को भी रोका. हरियाणा में हुई हिंसक झड़प में करीब 300 से अधिक लोग घायल हो गए, जबकि राज्य को करीब डेढ़ सौ करोड़ का नुकसान हुआ.

मध्यप्रदेश पर हिंदुस्तान बंद का असर

मध्यप्रदेश के हालत सबसे ज्यादा बेकार रहे. जहां ग्वालियर, चंबल में बहुत ज्यादा हिंसक मामले सामने आए. डबरा में ट्रेन को जबरन रोका गया तो वहीं वाहनों में भी जमकर तोड़फोड़ की गई. हिंसक प्रदर्शन में करीब 6 लोगों की जान चली गई, जबकि करीब 280 लोग घायल हो गए. हिंदुस्तान बंद के कारण राज्य को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ा.

यूपी के हालात

उत्तर प्रदेश में हिंदुस्तान बंद के कारण हापुड़, मुजफ्फरनगर, आगरा, मेरठ समेत आधा दर्जन जिलों में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला. प्रदर्शनकारियों ने करीब दो दर्जन गाड़ियों को फूंक दिया. मेरठ में पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया. हिंसक प्रदर्शन में मुजफ्फरनगर में एक शख्स की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हो गए. घायलों में दो की हालत गंभीर बताई जा रही है.

पंजाब में प्रदर्शनकारियों का उपद्रव

प्रदर्शनकारियों ने जबरन बाजार, सभी शिक्षण संस्थानों, सरकारी और प्राइवेट बसें बंद करा दी. यहां तक की उग्र प्रदर्शन के कारण शताब्दी, शान-ए-पंजाब एक्सप्रेस सहित कुछ ट्रेनों को भी रद करना पड़ा. डीएमयू के शीशे तोड़े गए, एक दर्जन चारपहिया और दुपहिया वाहनों में तोड़फोड़ की गई. हिंसा में 15 लोग घायल हो गए.

हिंसक प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम न्यायालय के दिशानिर्देश

हिंसक प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर सुप्रीम न्यायालय द्वारा कई दिशानिर्देश जारी है. ऐसे में प्रदर्शन के नाम पर तोड़फोड़  उपद्रव मचाने वालों को कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है. सड़कों पर उतर कर सरकारी-निजी संपत्ति  आमजन को निशाना बनाए जाने से बचाने के लिए प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट 1984 निष्प्रभावी साबित हो रहा था. ऐसे में सुप्रीम न्यायालय ने इसका स्वत: संज्ञान लिया  साल 2007 से 2017 के बीच तीन दिशा-निर्देश जारी किए.

पहला दिशा निर्देश

2007 में सुप्रीम न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों तथा पुलिस को इस मामले में दिशा-निर्देश जारी किए. इसके तहत विरोध प्रदर्शन, रैली या बंद का आयोजन करने वाले राजनीतिक दलों या संगठन के नेताओं को इसकी पूर्व में लिखित अनुमति लेने  नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार बनाए जाने की बात कही. सरकारों ने बोला कि वे विरोध प्रदर्शन की वीडियोग्राफी कराना सुनिश्चित करें. अभी 23 राज्यों में सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए कानून बनाए गए हैं.

उत्तर प्रदेश में पहल

उत्तर प्रदेश में बीएसपी गवर्नमेंट ने विरोधियों के धरना-प्रदर्शन से परेशान होकर प्रिवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट 2011 की रूपरेखा तय की, लेकिन तैयार नहीं हो सकी. सुप्रीम न्यायालय के आदेश  हाइकोर्ट के आदेश पर जुर्माने की नोटिस या कुछ वसूली मात्र की गई.

मुआवजे का प्रावधान

आंध्र प्रदेश में हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान पीड़ित लोगों को मुआवजा दिए जाने संबंधी अधिवक्ता कोशी जैकब की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम न्यायालय ने पीड़ितों को मुआवजे का प्रावधान संबंधी आदेश 2009 में दिया.

जवाबदेही तय हो

28 जनवरी, 2017 को एक बार फिर सुप्रीम न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिशा-निर्देश जारी किए. सुप्रीम न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को न्यायालय गठित कर उनसे धरना-प्रदर्शन के दौरान हुई क्षति की जवाबदेही तय करने  मुआवजा दिलाने का आदेश दिया.

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