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गवर्नमेंट ने उत्पाद शुल्क में कटौती से इनकार

नई दिल्लीः गवर्नमेंट ने अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में पेट्रोल के दाम में वृद्धि से उपभोक्ताओं को राहत देने के लिये उत्पाद शुल्क में तत्काल किसी प्रकार की कटौती की आसार से सोमवार को मना कियावैश्विक बाजारों में ऑयल के दाम बढ़ने से जहां डीजल उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है वहीं पेट्रोल चार वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंच गया है भाजपा नीत एनडीए गवर्नमेंट ने वैश्विक मार्केट में कीमतों में नरमी के दौरान राजस्व बढ़ाने के इरादे से नवंबर 2014  जनवरी 2016 के बीच उत्पाद शुल्क में नौ बार वृद्धि की हालांकि पिछले वर्ष अक्तूबर में इसमें दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई

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यह पूछे जाने पर कि क्या दूसरी बार उत्पाद शुल्क में कटौती की जा सकती है, वित्त सचिव हसमुख अधिया ने कहा, ‘‘फिलहाल नहीं जब भी हम इसकी समीक्षा करेंगे, आपको इसकी जानकारी दी जाएगी ’’  इससे पहले, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र मुख्य ने बोला कि गवर्नमेंट पेट्रोल के अंतर्राष्ट्रीयमूल्यों पर नजर रख रही है लेकिन मुक्त मार्केट मूल्य निर्धारण व्यवस्था से पीछे नहीं हटा जाएगा

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प्रधान ने बोला कि अगर पेट्रोल  डीजल को जितनी जल्दी माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाता है, उपभोक्ताओं को फायदा होगा अंतर्राष्ट्रीय ऑयल बाजारों में दाम बढ़ने से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल मूल्य आज चार वर्ष के उच्च स्तर 73.83 रुपये लीटर जबकि डीजल की दर अबतक के उच्चतम स्तर 64.69 रुपये पर पहुंच गई राष्ट्रीय राजधानी में यूरो-6 मानक वाले पेट्रोल  डीजल की बिक्री की शुरूआत को लेकर आयोजित प्रोग्राम में मुख्य ने कहा, ‘‘भारत को सभी को ऑयल उपलब्ध कराने के लिये मार्केट आधारित मूल्य व्यवस्था की आवश्यकता है ’’

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उन्होंने बोला कि ईंधन मूल्य निर्धारण पारदर्शी प्रणाली पर आधारित है  भाव में तेजी का कारण अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में दाम का चढ़ना है ‘‘जब ऑयल के दाम चढ़ते हैं, निश्चित रूप से उपभोक्ताओं को तकलीफ होती है ’’ हालांकि मंत्री ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिये उत्पाद शुल्क में कटौती जैसे कदम के लिये गवर्नमेंट के हस्तक्षेप का कोई इशारा नहीं दिया उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र तथा राज्य विकास जरूरतों को पूरा करने के लिये कर राजस्व पर निर्भर हैं पेट्रोल  डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क का 42 फीसदी भाग राज्यों को जाता है  शेष 60 फीसदी का उपयोग राज्यों में विकास योजनाओं में केंद्र की हिस्सेदारी के वित्त पोषण के लिये किया जाता है ’’

प्रधान ने बोला कि GST परिषद को ऊर्जा सुरक्षा  ग्राहकों के हित में पेट्रोलियम को GST के दायरे में लाने पर विचार करना चाहिए

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