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आज हमें इज़राइल से सीख लेने की ज़रूरत है

आज इराक में ISIS द्वारा मारे गए 39 में से 38 हिंदुस्तानियों के मृत शरीर भारत आ गये हैं लेकिन हिंदुस्तान के लोगों को अब तक गुस्सा नहीं आया है  ये बहुत बड़ी विडंबना है कि हमारे राष्ट्र में जाति के नाम पर लोगों की भावनाएं बहुत जल्दी आहत हो जाती हैं  लेकिन जब इंडियन नागरिकों की मर्डर होती है तो किसी इंडियन का दिल नहीं दुखता आज दिनभर आपने देखा कि हमारे राष्ट्र में जाति के नाम पर बहुत सारे लोग सड़कों पर उतर आए  इस भीड़ ने राष्ट्र के कई राज्यों में ज़बरदस्त हिंसा  तोड़फोड़ की दुख की बात ये है कि इराक में मारे गये हिंदुस्तानियों की तरफ किसी ने देखा तक नहीं

भारतीयता के नाम पर आज कहीं कोई इकट्ठा नहीं हुआ  किसी ने विरोध प्रदर्शन नहीं किया  किसी ने रैली निकालकर या सभा करके गवर्नमेंट से ये अपील नहीं की कि इराक की ज़मीन पर इंडियनलोगों का खून बहाने वाले आतंकियों से बदला लेना चाहिए आज की तारीख हिंदुस्तान के इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है  आज राष्ट्र में उन 38 हिंदुस्तानियों के ताबूत लाए गए हैं जिन्हें इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने मार दिया था इसलिए आज पूरे राष्ट्र को शोक में डूब जाना चाहिए था  आज पूरे राष्ट्र को आतंकवाद को समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए था 

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आज राष्ट्र के नेताओं को ये प्रतिज्ञा लेनी चाहिए थी कि वो इन हत्याओं का बदला लेंगे  लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ  हमारे राष्ट्र के लोगों ने इराक में इंडियन लोगों की मर्डर को भाग्य का निर्णयमानकर स्वीकार कर लिया  लोगों ने मन में ये सोच लिया कि जो लोग आतंकियों द्वारा बेरहमी से मारे गए, उनकी भाग्य ही बेकार थी 

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भारत शूरवीरों  महावीरों का राष्ट्र है  हमारे राष्ट्र में राम चरित मानस की एक चौपाई बहुत प्रसिद्ध है प्राण जाए पर वचन ना जाए  इसका मतलब है ‘जान भी दे सकते हैं लेकिन वचन नहीं तोड़ सकते’  किसी वचन को पूरा करने के लिए भी संकल्प की शक्ति  हिम्मत चाहिए  लेकिन ये कलियुग है इस युग में ना तो संकल्प दिखाई देता है  ना ही हिम्मत  हमारे राष्ट्र के वीर  महान पूर्वजों ने कभी भी हमें कायरता की एजुकेशन नहीं दी थी लेकिन आज कायरता  स्वार्थ के दीमक ने राष्ट्र को खोखला कर दिया है  लोग अपने फायदे के लिए बसों को जला सकते हैं दुकानों में आग लगा सकते हैं गाड़ियों में तोड़फोड़ कर सकते हैं लेकिन राष्ट्र के लिए कोई कुछ नहीं सोचता 

आज दोपहर करीब 2 बजकर 30 मिनट पर हिंदुस्तान के विदेश राज्य मंत्री जनरल वी के सिंह इंडियन वायु सेना के C-17 Globemaster विमान से अमृतसर एयरपोर्ट पहुंचे उनके साथ 38 हिंदुस्तानियों के मृत शरीर थे  इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने इंडियन लोगों को इराक़ के मोसुल से Kidnap किया था   इराक़ के ही बदूश इलाक़े में उनकी मर्डर करके, मृत शरीर को वहीं दफना दिया था ये मृत शरीर लंबे वक्त से इराक के बदूश में ही दफन थे  इन शवों की हालत बहुत बेकार हो चुकी थी  क्योंकि इन्हें ज़मीन से खोदकर निकाला गया था इसीलिए प्रशासन ने भी मारे गए लोगों के परिवारों से ये अपील की थी कि वो मृत शरीर के ताबूत को ना खोलें लेकिन कई परिवार जो सालोंसे अपनों का इंतज़ार कर रहे थे 

वो खुद को रोक नहीं सके  उन्होंने इन शवों को अपनी आंखों से देखा  लेकिन इन ताबूतों में अस्थियों के अतिरिक्त कुछ भी बचा नहीं था इस ख़बर में 38 हिंदुस्तानियों के परिवारों का दर्द है आज इस ख़बर ने हिंदुस्तान के उन लोगों पर सवाल उठाया है जो जाति की पॉलिटिक्स में व्यस्त रहते हैं  आतंकियों की सांसें बंद करने के बजाए, हिंदुस्तान बंद करने में अपनी पूरी ऊर्जा खर्च करते हैं ये कहते हुए हमें अच्छा नहीं लग रहा लेकिन हिंदुस्तान के लोगों की शांतिप्रियता  अहिंसक नीति ने हिंदुस्तान को एक Defensive यानी रक्षात्मक प्रवृत्ति वाले राष्ट्रों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है 

पिछले 70 सालों में हमारे राष्ट्र की सरकारों ने जिस तरह की विदेश नीति अपनाई है उससे हमारे राष्ट्र की यही छवि बनी है कि हिंदुस्तान कभी भी बदला नहीं ले सकता  पाक जैसा एक छोटा सा राष्ट्र बार-बार हिंदुस्तान पर हमला करने की हिम्मत रखता है क्योंकि उसे ये पता है कि हिंदुस्तानकभी भी सीमा पार करके उसे समाप्त नहीं करेगा  आतंकी मुंबई पर 26-11 जैसे हमले करने की हिम्मत इसलिए रखते हैं क्योंकि वो ये जानते हैं कि हिंदुस्तान इसका बदला कभी नहीं लेगा हमने आतंकियों के विरूद्ध POK में घुसकर Surgical Strike ज़रूर की है लेकिन दुर्भाग्य से बीते एक हजार सालों में हमारे राष्ट्र में विदेशी हमलावरों ने इस तरह हिंदुस्तान के स्वाभिमान को कुचला है कि अब इस छवि को बदलने के लिए बहुत सारी Surgical Strikes की ज़रूरत है 

((इतिहास में विदेशियों ने हिंदुस्तान को सोने की चिड़िया बोला  जिसके पंख नोचने के लिए बार-बार हमले होते रहे  हमें इराक जैसी घटनाओं से सबक लेना होगा हमको फिर से सोने की चिडिया नहीं बनना है बल्कि एक दहाड़ता हुआ सोने का शेर बनना है  जिसको छेड़ने की हिम्मत कोई भी ना कर सके  ))

आज हमें इज़राइल से सीख लेने की ज़रूरत है  Israel अपने राष्ट्र के नागरिकों के शवों की प्रतीक्षा नहीं करता बल्कि हत्यारों से बदला लेने का संकल्प करता है  साल 1967 में कई अरब राष्ट्रों ने Israel पर हमला बोल दिया  Israel ने इतनी तेज़  रामवाण कार्रवाई की थी कि सिर्फ 6 दिन के अंदर इन सभी राष्ट्रों ने घुटने टेक दिए  5 सितंबर 1972 को Germany के Munich शहर में Olympic Games के दौरान फिलिस्तीन के आतंकियों ने Israel के 11 खिलाड़ियों को बंधक बना लिया था    उस वक्त आतंकियों ने मांग रखी थी, कि Israel  की जेलों में बंद 234 फिलस्तीनियों को रिहा किया जाए, लेकिन Israel ने दो टूक शब्दों में उनकी मांग मानने से इंकार कर दिया था 

जबाव में फिलिस्तीन के आतंकियों ने Israel के 6 कोच  5 एथलीट्स की मर्डर कर दी जवाबी कार्रवाई में इस हमले को अंजाम देने वाले 8 आतंकी मार दिए गए लेकिन Israel का बदला अभी अधूरा था Israel ने अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद की मदद से उन सभी लोगों के कत्ल की योजना बनाई, जिन्होंने इस हमले की साज़िश रची थीइस मिशन को Operation Wrath of God यानी भगवान का कहर  बोला गया थाइसके बाद Mossad के Agents संसार के अलग-अलग राष्ट्रों में जाकर करीब 20 वर्ष तक गुनहगहारों को मारते रहे  वो तब तक नहीं रुके, जब तक एक-एक आतंकी मारा नहीं गया 

लेकिन हिंदुस्तान Israel से दोस्ती तो कर सकता है, हथियार खरीद सकता है, लेकिन हिम्मत नहीं ले सकता क्योंकि हिंदुस्तान में आम लोग ही आतंकवाद के विरूद्ध एकजुट नहीं हो पाते हैं  साल2014 में जब बगदादी ने खुद को खलीफा घोषित किया  तब हमारे राष्ट्र में कई कट्टरपंथी लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने बगदादी को अपना खलीफा मान लिया था  इस्लाम के एक विद्वान ने तो बगदादी को खलीफा मानकर उसे चिट्ठी भी लिख दी थी  हमारे राष्ट्र में कई नवयुवकों ने भी बगदादी को अपना खलीफा मान लिया था  वो इस्लामिक स्टेट के लिए जंग लड़ने के लिए इराक पहुंच गए थे ऐसे लोग  इनकी विचारधारा राष्ट्र की एकता  अखंडता के लिए बहुत बड़ा संकट है 

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