Saturday , November 17 2018
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गवर्नमेंट के इस फरमान से परिजनों को फिर हुआ शक

इराक में मारे गए हिंदुस्तानियों के शवों के ताबूत न खोलने के आदेश के बाद परिजनों ने केंद्र गवर्नमेंट पर सवाल दागा है उनका कहना है कि वो इस बात पर कैसे यकीन करें कि ये मृत शरीरउनके अपने लोगों के ही हैं? हालांकि विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह का कहना है कि हिंदुस्तानियों के शवों को डीएनए टेस्ट के बाद ही हिंदुस्तान वापस लाया गया है मालूम हो कि इराक में मारे गए 39 हिंदुस्तानियों में से 38 के मृत शरीर के अवशेष सोमवार को विशेष विमान से हिंदुस्तान वापस लाए गए  उन्हें उनके रिश्तेदारों को सौंप दिए गए इन अवशेषों को वापस लाने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह खुद इराक गए थे ये अवशेष हिंदुस्तान तो आ गए, लेकिन गवर्नमेंट के एक आदेश ने मृतकों के परिजनों को सकते में डाल दिया है

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केंद्र गवर्नमेंट ने आदेश जारी किया है कि जो अवशेष आ रहे हैं, उनके ताबूत न खोले जाएं, क्योंकि उसमें कई प्रकार की गैसें हैं, जो इंसान के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं गवर्नमेंट के इस आदेश के बाद मृतकों के परिजनों ने बोला कि इस आदेश के बाद उनको गवर्नमेंट के ऊपर संदेह हैउनका कहना है कि वो इस पर कैसे विश्वास करें कि जो अवशेष मिले हैं, वो उन्हीं के परिजनों के ही हैं? जालंधर के बलवंत राय के परिजनों का कहना है कि पहले ही हम  कई परिवार वाले कह चुके हैं कि वो पहले ताबूत देखेंगे  डीएनए की पुष्टि के बाद अंतिम संस्कार करेंगे, लेकिन गवर्नमेंट के इस आदेश के बाद लगता है कि गवर्नमेंट उनके साथ धोखा कर रही है हमारे पास न तो कोई ऐसा सबूत है  न ही कोई ऐसी निशानी, जिससे हमें यकीन हो जाए कि यह मृत शरीर हमारे बेटे राकेश कुमार का ही है हमें कोई भी ऐसी वस्तु नहीं दी गई है, जिससे यह साबित हो सके कि हम अपने बेटे का ही अंतिम संस्कार कर रहे हैं

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वहीं, सोमवार को हिंदुस्तानियों के अवशेषों को लेकर अमृतसर पहुंचे विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने बताया कि इराक में इंडियन दूतावास के पास वर्ष 2014 में आतंकी संगठन आईएसआईएस द्वारा अगवा किए गए 40 हिंदुस्तानियों के बारे में कोई रिकार्ड नहीं है, क्योंकि वे गैरकानूनी ट्रैवल एजेंटों के मार्फत वहां गए थे

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