Thursday , November 15 2018
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मनुवाद पर हमला, आंबेडकर-कांशीराम का गुणगान

बीएसपी के संस्थापक कांशीराम की स्मृति में बने उपवन मैदान में कल भीड़ की निगाहों में गेरुआ कपड़ा पहनी बीजेपी सांसद साध्वी सावित्री बाई फुले थीं, लेकिन वहां पर पूरा पंडाल नीले झंडे-बैनर जय भीम के नारों से गूंज रहा था. वहां जगह-जगह डॉ भीमराव आंबेडकर  कांशीराम के कटआउट भी लगे थे.साध्वी यह बताने से नहीं चूकीं कि उनके तन पर जो कपड़ा है वह गौतम बुद्ध का चीवर है.Image result for नीले बैनर तले साध्वी सावित्री बाई फुले की बीजेपी विरोधी मुहिम

कभी बीजेपी  नरेंद्र मोदी का गुणगान करने में सक्रिय सावित्री बाई फुले के के मंच पर न तो बीजेपी के किसी नेता का चित्र था  न ही उनके उद्बोधन में किसी का जिक्र. समर्थकों ने साफ कर दिया कि अब उनकी मुहिम बीजेपीगवर्नमेंट के विरोध में है.

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कांशीराम स्मृति उपवन में आयोजित साध्वी की रैली ने कई संदेश दिए. कभी जिला पंचायत सदस्य रहीं साध्वी को जिस बीजेपी ने विधायक  फिर सांसद बनाया अब वह उसी के विरूद्ध हैं. साध्वी ने एलान कर दिया कि वह यूपी के जिलों  राष्ट्र भर में संविधान  आरक्षण बचाने के लिए रैली करेंगी. साध्वी ने यह आंदोलन उस समय शुरु किया है जब 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी चल रही है.

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एक तरफ बीजेपी गवर्नमेंट दलित महापुरुषों का ज़िंदगी वृत्त पाठ्यक्रम में लागू करने के साथ ही उनके हितों को लेकर अभियान चला रही है, लेकिन साध्वी अपने तेवर से सब कुछ खारिज करने में जुट गई हैं. चूंकि वह बीजेपीकी सांसद हैं  अपनी गवर्नमेंट के विरूद्ध मोर्चा खोल रही हैं इसलिए चुनावी समीकरणों को देखते हुए इसे गंभीर माना जा रहा है. साध्वी समेत सभी वक्ताओं ने आंबेडकर की प्रतिमा  दलितों पर हो रहे हमले को हवा देकर भी माहौल बनाने की प्रयास की.

साध्वी की रैली में ज्यादातर वक्ताओं ने मनुवाद पर हमला करने के साथ ही आंबेडकर, गौतम बुद्ध  कांशीराम का गुणगान किया. निशाने पर प्रदेश की योगी  केंद्र की मोदी गवर्नमेंट भी थी. दलित उत्पीडऩ  आरक्षण के मुद्दे पर जज्बातों को उभारने के साथ ही दलितों से लामबंद होने का आह्वान था. मंच पर बौद्ध धर्म के अनुयायी भी थे. सभी वक्ता सावित्री बाई फुले को दलितों की सबसे बड़ी लड़इया के रूप में प्रस्तुत करने में लगे थे. इसीलिए जब उन्हें सोने का मुकुट पहनाकर हाथों में तलवार दी गई तो भीड़ में आये उत्साही युवा जिंदाबाद के नारों के साथ थिरकने लगे थे. महाराष्ट्र से आयी गायिका सीमा ने तो मनुवादियों का मुंह करें काला गीत सुनाकर दो ढाई दशक पहले के दलित आंदोलन की याद भी दिला दीं.

मोदी पर हमला, मायावती से परहेज नहीं

नमो बुद्धाय जन सेवा समिति के अध्यक्ष अक्षयवर नाथ कन्नौजिया ने बीजेपी विरोधी पृष्ठभूमि पहले ही तैयार कर दी थी. उन्होंने बोला कि बाबा साहब हिंदुस्तान को बुद्धमय  कांशीराम बहुजनमय बनाना चाहते थे  अब उसकी आरंभ हो गई है. चाहे वामसेफ के मनीराम बहल हों या अन्य वक्ता दलितों के विरूद्ध हो रही घटनाओं के लिए मोदी  योगी को जिम्मेदार ठहरा रहे थे. संविधान से छेड़छाड़ प्रोन्नति में आरक्षण, घुड़सवारी करने पर दलित पर हमला, आंबेडकर की मूर्तियां तोडऩे जैसे मुद्दों पर मोदी को चेतावनी भी दे डाली कि यह सब महंगा पड़ेगा.

आरक्षण बचाओ आंदोलन के नेता अवधेश वर्मा तो यह कहने से नहीं चूके कि ‘जो गवर्नमेंट संविधान निर्माता के नाम में संशोधन कर सकती है उसे संविधान बदलने में हिचक नहीं होगी. इसीलिए बीजेपी की उल्टी गिनती प्रारम्भ हो गई है.‘ यह भी हकीकत है कि साध्वी सावित्री ने अपनी जुबान से बीजेपी के किसी नेता के बारे में कुछ नहीं कहा, लेकिन गवर्नमेंट की नीतियों पर उनके तीखे विचार समर्थकों को उद्वेलित कर रहे थे. खास बात यह कि साध्वी को बहुजन समाज के हित के नाम पर अब मायावती से भी कोई परहेज नहीं है.

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