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आधी रात को जी उठे ईसा मसीह, खुशी से झूमे लोग

नई दिल्ली, . ईस्टर डे की पूर्व संध्या पर शनिवार को गिरजाघरों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गई. मसीही विश्वासियों ने प्रभु यीशु के पुनर्जीवित होने की याद में पूजा-अर्चना की. प्रवचन के माध्यम से प्रभु यीशु के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई. प्रार्थना सभाओं में सभी के कल्याण की कामना की गई  दूसरों के सुख के लिए कष्ट सहने का संकल्प लिया गया. रात के 12 बजते ही ईस्टर डे की बधाइयां देने का सिलसिला प्रारम्भ हो गया. केक काटा गया. प्रभु के पुनर्जीवित होने की खुशियां मनाई गई. लोगों ने पटाखे फोड़े.

इसके पहले शनिवार की रात में ईसाई समुदाय के लोगों द्वारा कब्रिस्तान में मोमबती जलाकर दिवंगत लोगों की आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई. आधी रात में आवर लेडी क्वीन चर्च में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया. इसके माध्यम से शांति, प्रेम  सद्भाव का संदेश दिया गया.प्रभु यीशु के सहयोग को याद किया गया.

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बता दें कि ईस्टर ईसाइयों के सबसे खास दिनों में से एक है. संसार भर में क्रिश्चियन्स इस दिन को खुशी से मनाते हैं. गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह को क्रॉस पर लटकाया गया था. मान्यता है कि इसके तीन दिन बाद जीज़स पुनःजीवित हुए थे. इसी दिन को ईस्टर की तरह मनाते हैं. मानते हैं कि जीज़स ने संसार के पापों की मूल्य चुकाने के लिए ये दुख सहन किया था.हालांकि ईसाइयत से अलग ईस्टर को अप्रैल के महीने में नयी फसल के त्योहार की तरह भी मनाया जाता है.

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‘ईस्टर’ शब्द जर्मन के ‘ईओस्टर’ शब्द से लिया गया, जिसका अर्थ है ‘देवी’. यह देवी वसंत की देवी मानी जाती थी. इसके बाद महाप्रभु चालीस दिनों तक अपने शिष्यों के बीच जाते रहे  उन्हें प्रोत्साहित करते रहे, उपदेश देते रहे कि, ‘तुम्हें शांति मिले.‘ इससे उनमें साहस  विश्वास जगा निर्भय होकर उन्होंने ईसा के पुनः जीवित होने का संदेश दिया. ईसाइयों का विश्वास है कि महाप्रभु ईसा जीवित हैं  महिमाशाली हैं, वे उन्हें आनंद, आशा  साहस हमेशा प्रदान कर रहे हैं. इसे ही संबल बनाकर ईसाई सभी कष्टों को सहन करने को तैयार रहते हैं, सभी अन्यायों का सामना करने को उद्यत रहते हैं.

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