Loading...

चाइना पर नजर रखेगा हिंदुस्तान

पीएम नरेंद्र मोदी की पिछले दिनों की खाड़ी राष्ट्रों की यात्रा की रणनीति सफल होती दिख रही है. इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने ओमान, फलस्तीन व जॉर्डन की यात्रा पर थे. जहां उन्होंने कई रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते के तहत इंडियन नौसेना को ओमान के दुक्म पोर्ट तक पहुंच हासिल हो सकेगी.Image result for पीएम नरेंद्र मोदी की पिछले दिनों की खाड़ी राष्ट्रों की यात्रा की रणनीति

हिंद महासागर के पश्चिमी भाग में हिंदुस्तान के रणनीतिक पहुंच के लिए यह समझौता बहुत अहम माना जा रहा है. जानकारों का मानना है कि इस समझौते के बहुत ज्यादा दूरगामी परिणाम होंगे. बता दें कि इस वर्ष मार्च में पर्सियन गल्फ में हिंदुस्तान व यूएई संयुक्त सैन्य एक्सरसाइज करेंगे.

बता दें कि जिस तरह से चाइना पाक के ग्वादर पोर्ट को विकसित कर रहा है, उसे देखते हुए दुक्म में हिंदुस्तान की मौजूदगी रणनीतिक तौर पर बहुत ज्यादा अहम हो जाएगा. इस समझौते के बाद भारत चाइना को गल्फ ऑफ ओमान पर रोकने में सक्षम हो जाएगा.

बता दें कि ग्वादर पर ओमानी सुल्तान का हक था व उन्होंने 1950 के दशक में हिंदुस्तान को इससे जुड़ने की विनती की थी. लेकिन उस समय हिंदुस्तान ने उस विनती को इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि हिंदुस्तान जानता था कि वह इसे पाक से नहीं बचा पाएगा.
आगे पढ़ें
चीन ने यहां बहुत ज्यादा निवेश किया है.
लेकिन पिछले दिनों हिंदुस्तान व ओमान के बीच हुए समझौते के बाद साफ हो जाता है कि हिंदुस्तान खाड़ी राष्ट्रों में धीरे-धीरे ही सही लेकिन अपनी मौजूदगी व अपने असर को बढ़ा रहा है. उल्लेखनीय है कि सेशल्स में पिछले दिनों से चले आ रहे घरेलू राजनीतिक विरोध के बाद भी हिंदुस्तान के साथ एक संशोधित समझौते पर हस्ताक्षर किया था, जिसके तहत हिंदुस्तान को इस राष्ट्र में ‘मिलिटरी इन्फ्रास्ट्रक्चर’ तैयार करने की इजाजत भी मिल गई है. हिंदुस्तान के साथ मॉरिशस के पहले से इस तरह का समझौता मौजूद है.

यह भी पढ़ें:   आतंकी फरहान व उसकी पत्नी के बैंक खाते सीज़
Loading...
loading...

बता दें कि हिंद महासागर में दुक्म की अहमियत को अमेरिका पहले से जानता था तभी उसने अपनी 2013-14 में ही अपनी स्थिति यहां मजबूत बना ली है लेकिन अब हिंदुस्तान भी धीरे-धीरे वहां अपनी स्थिति मजबूत बनाने की ओर कदम उठा रहा है. इससे पहले ब्रिटेन भी यहां समझौता कर चुका है जबकि चाइना ने तो यहां बहुत ज्यादा निवेश किया है.

बताते चलें कि हिंदुस्तान व ओमान के करीबी व लंबे समय से राजनीतिक संबंध रहे हें. ओमान हिंदुस्तान के लिए बहुत ज्यादा अहम माना जाता रहा है. बात चाहें भू रणनीतिक की हो या फिर हिंद महासागर में अपनी पहुंचि मजबूत करने की हर मामले में ओमान के हिंदुस्तान से संबंध अहम साबित होंगे. क्योंकि ओमान एक गुट निरपेक्ष राष्ट्र है व उसके ईरान से भी गहरे संबंध है.

यह भी पढ़ें:   राहुल के अध्यक्ष बनने से कितनी बदल जाएगी कांग्रेस

ओमान की सेनाओं के साथ हिंदुस्तान की तीनों सेनाएं एक्सरसाइज कर चुकी हैं. हालांकि दुक्म का मामला अलग है. यह कोई प्राकृतिक बंदरगाह नहीं है, बल्कि यह कृत्रिम है जिसे विशुद्ध आर्थिक व रणनीतिक उद्देश्य से बनाया गया है.

Click Here
पढ़े और खबरें
Visit on Our Website
Loading...
loading...