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18:9 डिस्प्ले वाली स्क्रीन की खास बातें…

फोन में नयी तकनीक पेश कर फोन निर्माता खुद को दूसरों से बेहतर बताते हैं. अब 18:9 डिस्प्ले आई है. देखिए, यह आपके कितने कार्य की है? तेजी से बदलती तकनीक के इस दौर में आए दिन चलन बदलते रहते हैं.Image result for 18:9 डिस्प्ले वाली स्क्रीन की खास बातें

पिछले वर्ष हमने डुअल कैमरा की बढ़ती मांग व फ्लैगशिप से लेकर बजट फोन्स में भी इनको देखा, इसी दौरान एक व चलन, जो स्मार्टफोन की संसार में तेजी से बढ़ रहा है, वह है बेजललेस डिस्प्ले. डुअल कैमरा की ही तरह बेजललेस डिस्प्ले फ्लैगशिप फोन्स में ही मिलती थी, लेकिन धीरे-धीरे अब यह बजट फोन्स में भी देखने को मिल रही है. बेजललेस डिस्प्ले में ज्यादातर 18:9 आस्पेक्ट रेशियो के साथ स्क्रीन मिलती है. अब यह जानना महत्वपूर्ण है कि आखिर इस डिस्प्ले से आपके Smart Phone प्रयोग करने के अनुभव में क्या परिवर्तन आएगा?
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18:9 डिस्प्ले वाली स्क्रीन की खास बातें
बड़ी डिस्प्ले, छोटा साइज : 18:9 आस्पेक्ट रेशियो वाले फोन में आपको एक बड़ी स्क्रीन मिलती है. इस तरह की स्क्रीन में दोनों साइड व ऊपर-नीचे बेजल्स बहुत ज्यादा पतले या न के बराबर ही होते हैं. इस तरह की डिस्प्ले के कारण अब छोटे 5.5 इंच व 16:9 आस्पेक्ट रेशियो स्क्रीन वाले साइज के फोन में आपको 6 इंच व 18:9 आस्पेक्ट रेशियो वाली डिस्प्ले मिल जाएगी. इस तरह ऐसे लोग, जिन्हें बड़े फोन पसंद नहीं होते व इस कारण उन्हें छोटी डिस्प्ले से समझौता करना पड़ता था. अब वे भी छोटे आकार के फोन में बड़ी स्क्रीन का आनंद ले पाएंगे.

बेहतर मल्टीटास्किंग : एंड्रॉयड 7.0 व उसके बाद के वर्जन में बिल्ट इन स्प्लिट मोड आता है. इस मोड की मदद से स्क्रीन को दो भागों में बांटकर एक साथ एक ही समय में दो ऐप्स को प्रयोग किया जा सकता है. 18:9 आस्पेक्ट रेशियो वाली डिस्प्ले अपनी चौड़ाई की तुलना में लंबाई में दोगुनी होती है. इस कारण इस तरह की स्क्रीन सरलता से दो बराबर भागों में बंट जाती है व आप सुगमता से दो ऐप्स का प्रयोग कर पाएंगे.

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कम डाटा की खपत : लगभग सभी ऐप्स व वेबसाट्स को ऊपर से नीचे की ओर स्क्रॉल करके प्रयोग किया जाता है. अब 18:9 आस्पेक्ट रेशियो वाली स्क्रीन के कारण एक ही फ्रेम में ज्यादा कंटेंट देखा जा सकता है. इसका मतलब है कि आपको बार-बार स्क्रीन को स्क्रॉल नहीं करना पड़ेगा, जिससे आपके डाटा की खपत भी कम होगी. ऐसे लोग, जो फोन पर बड़े आर्टिक्ल या ई-बुक्स पढ़ना पसंद करते हैं, उनके लिए इस स्क्रीन वाले फोन बड़े कार्य के साबित होंगे.

बेहतर वर्चुअल रिएलिटी अनुभव : 18:9 डिस्प्ले वर्चुअल रिएलिटी के लिहाज से अच्छा माना जाता है. इस आस्पेक्ट रेशियो में स्क्रीन साइड वाय साइड व्यू में बंट जाती है, जिससे आपकी दाईं आंख दाईं ओर की स्क्रीन व बाईं आंख बाईं ओर की स्क्रीन को देख पाती है व साथ ही आपको 16:9 आस्पेक्ट रेशियो स्क्रीन से ज्यादा कंटेंट देखने को मिलता है.

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लीटरबॉक्सिंग है बड़ी समस्या: जहां अभी सारी ऐप्स, गेम्स व वीडियोज 18:9 आस्पेक्ट रेशियो के लिहाज से नहीं बनाए जाते हैं. ऐसे में इस आस्पेक्ट रेशियो वाली स्क्रीन पर इनका प्रयोग करने पर आपको लीटरबॉक्सिंग (यानी लैंडस्कैप मोड पर आपको दोनों ओर काली पट्टियां दिखती हैं) मिलती है. वहीं कुछ फोन ऐप के इंटरफेस को स्ट्रैच कर उन्हें फुल स्क्रीन पर दिखाते हैं. ऐसे में ऐप के किनारों का कंटेंट साफ नहीं दिखता है.

ऑन स्क्रीन बटन: डिस्प्ले बढ़ने के साथ ही मोबाइल के साइड बेजल के अतिरिक्त टॉप व बॉटम बेजल का जगह भी कम हो गया है. इस कारण फोन के निचले हिस्से में कम स्थान बचती है व कैपेसिटिव बटन के लिए कोई जगह नहीं बचता. ऐसे में फोन की स्क्रीन पर ही बटन दिए जाते हैं. ऑन स्क्रीन बटन से स्क्रीन का कुछ भाग कम हो जाता है.

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कैमरा रिजॉल्यूशन में तालमेल न होना: हो सकता है कि मोबाइल की स्क्रीन 18:9 हो, लेकिन कैमरे से दिए गए आस्पेक्ट रेशियो में फोटो नहीं आती. उदाहरण के लिए, गैलेक्सी एस8 का 12 एमपी रियर कैमरा, लेकिन इसका आस्पेक्ट रेशियो 4:3 है. इसके कैमरा ऐप में यह फर्क दिखेगा कि इसमें इमेज के दोनों तरफ आपको काली पट्टियां दिखेंगी. यदि आप 18.5:9 आस्पेक्ट रेशियो में फोटो लेते हैं व इमेज को पूरी स्क्रीन पर देखते हैं, तब फोटो का रिजोल्यूशन 9.7 एमपी ही रह जाता है.

स्क्रीन साइज और स्क्रीन एिरया में अंतर: यदि आप 16:9 आस्पेक्ट रेशियो के 5.7 इंच स्क्रीन वाले मोबाइल व 18:9 आस्पेक्ट रेशियो के 5.7 इंच स्क्रीन वाले मोबाइल की तुलना करें, तो 16:9 की डिस्प्ले में स्क्रीन क्षेत्र ज्यादा होता है. स्क्रीन साइज को मोबाइल की लंबाई के लिहाज से तिरछा मापा जाता है. इससे मोबाइल बनाने वाली कंपनियां फोन बनाते समय स्क्रीन का साइज लंबा रखती हैं. इस प्रकार यदि आपके हाथ लंबे हैं, तब कोई कठिनाई की बात नहीं. लेकिन यदि आपके हाथ छोटे हैं, तब 18:9 आस्पेक्ट रेशियो स्क्रीन का प्रयोग करना आपके लिए सरल नहीं होगा व आपको अपनी उंगलियों को डिस्प्ले के कोनों तक पहुंचाने में कठिनाई होगी.

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