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रक्त की कमी दूर करने के लिए नयी योजना पर कार्य प्रारम्भ

केंद्र गवर्नमेंट ने करोड़ों मरीजों को राहत देते हुए रक्त की कमी दूर करने के लिए नयी योजना राष्ट्रीय रक्त नीति पर कार्य प्रारम्भ हो चुका है. गवर्नमेंट ने अब व्यक्तिगत अस्पतालों को रक्तदान शिविर लगाकर रक्त एकत्रित करने व मरीजों को इसका फायदा देने की मंजूरी दी है. साथ ही रक्त से बने प्लाज्मा को भी व्यक्तिगत रक्त बैंक के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. जिसके बाद बोला जा रहा है कि सरकारी रक्त बैंकों से बहुत ज्यादा हद तक वजन कम होगा.Image result for रक्त की कमी दूर करने के लिए नयी योजना

केंद्र गवर्नमेंट ने राज्यों को दी चेतावनी, रक्त की कीमतों पर रखें नियंत्रण

अभी तक नियम था कि बगैर सरकारी रक्त बैंक की सहायता के व्यक्तिगत अस्पताल रक्तदान शिविर नहींलगा सकते. साथ ही दान में मिले आधे से ज्यादा रक्त यूनिट को सरकारी रक्त बैंक में देना महत्वपूर्ण है. वहीं व्यक्तिगत बैंकों को प्लाज्मा मिलने से जरूरतमंदों को समय पर रक्त मिल सकेगा. बता दें कि हिंदुस्तान में जहां हर साल करीब 1 करोड़ 20 लाख यूनिट रक्त दान में एकत्रित किया जाता है.

दान में मिले रक्त पर नहीं होगी वसूली

वहीं, दिल्ली की बात करें तो यहां वर्ष भर में करीब 6 लाख यूनिट रक्त एकत्रित होता है. जबकि डिमांड करीब 8 लाख यूनिट तक रहती है. इतना ही नहीं, रक्त लेने के लिए जहां सरकारी अस्पतालों से तिमारदारों को भागदौड़ करनी पड़ती है. वहीं, प्राइवेट बैंकों में इनसे प्रति यूनिट डेढ़ से दो हजार रुपये तक लिया जाता है. यही वजह है कि गवर्नमेंट लगातार मरीजों की इस कठिनाई को दूर करने में जुटी है.

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हर मेडिकल कॉलेज में खुलेगा विभाग

मंत्रालय के एक वरिष्ठ ऑफिसर ने बताया कि राष्ट्रीय रक्त नीति के तहत इंडियन आर्युविज्ञान परिषद से हर मेडिकल कॉलेज में रक्तदान चिकित्सा विभाग खोलने की मांग की है. साथ ही इन विभागों में इंटर्नशिप कम से कम 15 दिन के लिए रखने का प्रस्ताव भेजा है. अभी तक इंटर्नशिप के लिए एमबीबीएस को पांच दिन मिलते थे. इसके अतिरिक्त फॉर्मेसी, नर्सिंग व एमबीबीएस पाठ्यक्रम में रक्तदान चिकित्सा एजुकेशन को भी शामिल किया जाएगा.

प्रोसेजिंग शुल्क माफ से होगा फायदा

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राज्य सरकारों को चेतावनी देते हुए केंद्रीय सेहत मंत्रालय ने रक्त की कीमतों पर नियंत्रण रखने व रक्त को प्रोसेजिंग शुल्क से मुक्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं. अभी तक ये शुल्क 50 से 1 हजार रुपये तक विभिन्न राज्यों में लिया जाता है. लेकिन अब शुल्क हटने से रक्तदान शिविरों की संख्या में इजाफा होने की आसार भी जताई जा रही है. राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) के एक ऑफिसर ने बताया कि प्रोसेजिंग शुल्क माफ होने से जहां रक्तदान शिविरों की संख्या बढ़ेगी. वहीं, इनसे एकत्रित रक्त यूनिट भी बढ़ेंगी.

दिल्ली में 6 हजार तक कीमत

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दिल्ली के अस्पतालों में रक्त जांच से लेकर एकत्रित करने व इसके घटक तैयार करने इत्यादि को मिलाकर करीब 6 हजार रुपये तक मूल्य पहुंचती है. जानकारों का कहना है कि सरकारी रक्त बैंक से 1050 व व्यक्तिगत से 1450 रुपये प्रति यूनिट रक्त लिया जा सकता है. लेकिन व्यक्तिगत बैंक इसके बाद भी कई तरह के शुल्क लगाती हैं. अब इन पर रोक लग सकेगी.

डंडे के जोर पर नहीं लेंगे रक्त

इतना ही नहीं, डंडे के जोर पर कोई भी रक्त बैंक किसी मरीज के परिजन से रक्त नहीं ले सकती है. आवश्यकता पडने पर उसे रक्त उपलब्ध कराना ही होगा. उन्होंने ये भी बताया कि जल्द ही रक्त बैंक सैल का गठन किया जाना है जो हरेक राज्य में अपने-अपने एरिया में रक्त बैंकों की जांच करेगा.

इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी के निदेशक डॉ। वानश्री सिंह का कहना है कि हमारे पास सरकारी व व्यक्तिगत अस्पतालों से तिमारदार रक्त लेने आते हैं. चूंकि रक्त देने से पहले उसकी उपलब्धता भी होनी चाहिए. इसलिए लोगों से समय समय पर रक्तदान करने की अपील करते हैं. व्यक्तिगत अस्पतालों को रक्तदान शिविर लगाने की अनुमति मिलने से बहुत ज्यादा राहत मिलेगी. रक्त की कमी व तिमारदारों को कम परेशान होना पड़ेगा.

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